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Chandigarh News: नहीं रहे चंडीगढ़ के पहले हॉकी ओलंपियन सुखबीर गिल, ब्रेन ट्यूमर ने छीन ली जिंदगी

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चंडीगढ़। शहर के पहले हॉकी ओलंपियन सुखबीर गिल (48) ब्रेन ट्यूमर से जिंदगी की जंग हार गए। उन्होंने शुक्रवार शाम 4 बजे सेक्टर-49 स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। शनिवार को सेक्टर-25 श्मशानघाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वह अपने पीछे दादी, पत्नी, 19 वर्षीय बेटी और एक 14 वर्षीय बेटा छोड़ गए। वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक खेलों और 2002 के कुआलालंपुर के विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके गिल को उनके बेटे जश्नजोत ने मुखाग्नि दी। श्मशानघाट में गिल की अंतिम विदाई पर उनकी पत्नी, बेटी और बेटा काफी भावुक हो गए। गिल की अंत्येष्टि पर यूटी प्रशासक के खेल विभाग निदेशक सौरभ अरोड़ा, कोच और मैनेजर पहुंचे। वहीं, पूर्व ओलंपियन प्रभजोत सिंह, पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान राजपाल सिंह, पूर्व ओलंपियन बलजीत सिंह ढिल्लो से लेकर पूर्व ओलंपियन धर्मवीर सिंह और हॉकी चंडीगढ़ के सचिव अनिल वोहरा भी पहुंचे। सभी ने नम आंखों से गिल को अंतिम विदाई दी। उनके जाने से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बॉक्स
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2006 में चला ब्रेन ट्यूमर का पता, सर्जरी भी कराई थी
सुखबीर सिंह गिल को दिसंबर 2006 में ब्रेन ट्यूमर की बीमारी का पता चला था। उन्हें कुछ समय से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। एक दिन अचानक उन्हें दौरा पड़ा और वह घर पर गिर पड़े। उन्हें एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया जहां सीटी स्कैन और एमआरआई परीक्षण की एक शृंखला के माध्यम से उन्हें ब्रेन ट्यूमर का पता चला। इसे ठीक करने के लिए कई ब्रेन सर्जरी करवाई थीं। पहली सर्जरी उत्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वीके काक ने की थी। हालांकि ट्यूमर का फिर से उभरना जारी रहा। इस कारण ओपन स्कल ऑपरेशन और गामा नाइफ रेडियो सर्जरी सहित विभिन्न जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ी। बीच में जब वह आंशिक रूप से ठीक हो गए तो वह स्कल कैप के साथ खेल के मैदान में लौटे और प्रीमियर हॉकी लीग में खेले। 2021 में आखिरी चिकित्सा प्रक्रिया ने उन्हें बिस्तर पकड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने घरेलू हॉकी में भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व किया और इसी में नौकरी की। भारत पेट्रोलियम ने ही गिल को सभी चिकित्सा सहायता प्रदान की और प्रमुख और महंगी सर्जरी और चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए अधिकांश चिकित्सा बिल उठाए।
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शहर से शुरू हुआ था हॉकी का सफर
सुखबीर गिल के हॉकी के खेल के शुरुआती दिनों में सेक्टर-41 में शिवालिक पब्लिक स्कूल में अपने हाॅकी के खेल को निखारा और बाद में सेक्टर-10 में डीएवी कॉलेज चले गए। उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने से पहले अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया। संन्यास लेने के बाद गिल ने मोहाली के शिवालिक पब्लिक स्कूल में एक अकादमी चलाई और उभरते और पेशेवर खिलाड़ियों को मंच प्रदान करने के लिए हर साल हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन किया। भारत पेट्रोलियम का प्रतिनिधित्व करने के अलावा चंडीगढ़ टीम के नियमित सदस्य रहे। वह सिडनी ओलंपिक (2000), कुआलालंपुर में हॉकी विश्व कप (2002) और 2002 में कोलोन (जर्मनी) में एफआईएच चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की ओर से खेले।
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