24 जनवरी को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ 6 केंद्रीय मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल भी चंडीगढ़ आ रहा है जो फ्रांस में अहम विभाग देख रहे हैं। इसके अलावा फ्रांस की सभी बड़ी कंपनियों के सीईओ का दल भी राष्ट्रपति के साथ चंडीगढ़ आएगा। सीईओ का यह दल भारत की बड़ी कंपनियों के सीईओ संग इंडो-फ्रेंच व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा करेगा।
राष्ट्रपति ओलांद और उनके साथ आने वाले पूरे प्रतिनिधिमंडल के लिए गाड़ियां भी फ्रांस से आएंगी। यह सभी गाड़ियां एक विशेष विमान के जरिए चंडीगढ़ भेजी जाएंगी। यह विमान एक दिन पहले यानी 23 जनवरी को ही चंडीगढ़ पहुंच जाएगा। गाड़ियां फ्रेंच अथॉरिटी की निगरानी में ही रहेंगी। पूरे काफिले में फ्रेंच की गाड़ियां ही सड़कों पर दौड़ती दिखेंगी। एक भी लोकल गाड़ी काफिले में इस्तेमाल नहीं होगी। सुरक्षा की दृष्टि से काफिले के लिए गाड़ियां फ्रेंच अथॉरिटी उपलब्ध करवा रही हैं।
इस दौरान कई एमओयू भी साइन होंगे। इसमें चंडीगढ़ सहित देश के तीन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का एमओयू भी शामिल है। साथ ही फ्रेंच कंपनियां भारत में बड़े निवेश की घोषणा भी कर सकती हैं। राष्ट्रपति ओलांद अपने विशेष विमान से चंडीगढ़ आ रहे हैं। उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी पूरे दौरे में साथ रहेगा।
राष्ट्रपति ओलांद की कार की खासियत
राष्ट्रपति ओलांद की कार ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह कार एक्सेलरेटर बूस्टर की सहायता से प्रति किलोमीटर महज 99 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करती है जो दूसरी कारों से बहुत कम है। सिटी में इस कार को इलेक्ट्रिक मोड पर चलाया जा सकता है। हालांकि रोड पर बेस्ट परफॉर्मेंस वाला एचडीआई डीजल इंजन और हाई एफिशिएंट मोड पावर ड्राइविंग भी इसकी खासियत है।
कार में हाईटेक सेफ्टी सिस्टम लगा है। इसमें से हाईड्रोलिक इलेक्ट्रिक पंप असिस्टेंस सिस्टम भी एक है। यह कार पूरी तरह से बुलेटप्रूफ है। बड़ी सनरूफ की सुविधा भी कार में उपलब्ध है। इसके अलावा पारदर्शी हेड अप डिस्प्ले स्क्रीन, 200 ब्रेक होर्स पावर (बीएचपी), फोर ड्राइव व्हील्स भी कार को दूसरों से अलग करती है।
डीएस 5 हाइब्रिड 4 के बेस मॉडल की कीमत लगभग 33 लाख रुपये है लेकिन राष्ट्रपति ओलांद की कार में कई अलग से सुविधाएं दी गई हैं जिससे इसकी कीमत कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।
इंडो-फ्रेंच रिश्ते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान:
इस दौरे से भारत-फ्रांस रिश्ते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। फ्रांसीसी नागरिक ली कार्बूजिए ने ही चंडीगढ़ का निर्माण किया था। इससे फ्रांस का चंडीगढ़ कनेक्शन काफी गहरा हो जाता है। इसी कनेक्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान भी मिलेगी।