चंडीगढ़ के ग्रामीणों की लाल डोरा सीमा खत्म करने की मांग प्रशासन की ओर से अपने अंतर्गत आते 13 गांवों की 12 पंचायतों को निगम के हवाले करने के साथ अब पूरी होने जा रही है। इस संदर्भ में प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना में पूरे के पूरे गांव ही निगम के हवाले कर दिए गए हैं। निगम ने अब इन गांवों की रेवेन्यू लैंड को टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही लाल डोरा की सीमा रेखा भी खत्म हो जाएगी और आबादी वाले सभी इलाकों में नगर निगम सड़क, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करेगा।
भू अधिग्रहण अधिकारी अर्जुन शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि बताया कि प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के बाद 13 गांव अब नगर निगम के हवाले कर दिए गए हैं। अब इनकी रेवेन्यू लैंड को नगर निगम टेकओवर करेगा। चंडीगढ़ प्रशासन के अंतर्गत आने वाले इन सभी 13 गांवों में अभी तक पंचायत स्तर के चुनाव हो रहे थे, लेकिन अब जैसे ही वर्तमान पंचायतों का टर्म खत्म हो जाएगा, ये सभी गांव निगम के हवाले माने जाएंगे। चंडीगढ़ में पंजाब न्यू कैपिटल पेरीफेरी कंट्रोल एक्ट-1952 के संबंध में हाल ही में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की थी, जिसमें कोर्ट ने साफ कहा था कि लाल डोरा सीमा के विरुद्ध थी।
साल 2009 में पांच गांवों के लोगों से हुआ था छल
साल 2006 में प्रशासन ने जो पांच गांव निगम के हवाले किए थे, पहले उनको भी पूरी तरह से निगम के हवाले कर दिया था, लेकिन वर्ष 2009 में एक अन्य अधिसूचना जारी कर इन पांचों गांवों की रेवेन्यू लैंड वापस ले ली थी। इसके साथ ही लाल डोरे के बाहर किए गए निर्माण कार्यों को गिराए जाने के नोटिस मिलने शुरू हो गए थे। प्रशासन की ओर से वर्ष 2009 की अधिसूचना के बाद निगम के अंतर्गत आते गांवों में ही दो तरह के कानून लागू हो गए थे।
इस वजह से पांच गांवों में फंसा लाल डोरे का मामला
इस संदर्भ में एक अधिकारी का कहना है कि वर्ष 2006 में जो पांच गांव निगम के हवाले किए गए थे, उनकी रेवेन्यू लैंड भी निगम को सौंपी गई है या नहीं, इस पर प्रशासन ने अब तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है। इस वजह से इन गांवों में लाल डोरे का मामला फंसा हुआ है।
ऐसे मिलेगी लाल डोरे से निजात
वर्ष 1996 में नगर निगम के गठन के समय जो चार गांव व मनीमाजरा निगम के अधिकार क्षेत्र में दिए गए थे। उनकी रेवेन्यू लैंड भी निगम को दी गई थी, इसलिए वहां लाल डोरा जैसी समस्या नहीं रही थी। यहां लाल डोरा के बाहर किए गए निर्माणों को निगम ने नियमित भी कर दिया था। बताया जाता है कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देश के बाद इस बार भी प्रशासन की ओर से वर्ष 1996 जैसी ही नीति अपनाई गई है। अगर ऐसा हुआ तो हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।