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चंडीगढ़वासियों ने जीता थियेटर आर्टिस्टों का दिल, तो कलाकारों ने भी कही ये बड़ी बात

Wed, 05 Sep 2018 09:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुदेश शर्मा, निदेशक, टीएफटी
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चंडीगढ़ आर्ट एंड कल्चर का गढ़ है और यहां आए दिन कला और साहित्य से जुड़े कार्यक्रम होते रहते हैं। इनमें पब्लिक की शमूलियत भी बराबर रहती है। अगर नाटक विधा को देखें तो सिटी में एक से बढ़कर एक थियेटर ग्रुप है, जो शानदार नाटकों का मंचन करते हैं। दर्जनों ऐसे नाटक हैं, जिन्होंने सिटी का रिकार्ड तोड़ दिल जीता है।
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यहां भी हम ऐसे नाटकों की बात कर रहे हैं जिनका जब भी मंचन हुआ है हमेशा शानदार तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। फिर चाहे वह नाटक कोर्ट मार्शल हो या फिर संध्या छाया। सिटी के थियेटर आर्टिस्टों से जब हमने नाटकों के बारे में बात की तो कई रोचक चीजें सामने निकल कर आईं। 

संजीदा है चंडीगढ़ की ऑडियंस
चंडीगढ़ में होने वाले नाटकों का कोई जवाब नहीं है। इसकी एक वजह यह भी है कि यहां की ऑडियंस एकदम संजीदा है। हम कई बार नाटक कोर्ट मार्शल का मंचन करते हुए सोचते हैं कि क्या लोग आएंगे, लेकिन होता यह है कि इस नाटक को देख चुके दर्शक अपने साथ और भी लोगों को लेकर आते हैं। अब आधे अधूरे और संध्या छाया को देख लीजिए वह भी गजब का नाटक है। सुदेश शर्मा, निदेशक, टीएफटी
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कपिल कल्याण, डायरेक्टर और एक्टर
अब नए नाटकों का मंचन भी जरूरी है
मैंने कोर्ट मार्शल में एक्ट किया था। वास्तव में मेरी पहचान भी इसी नाटक से बनी। मैंने इसमें कैप्टन विकास राय का रोल किया था। उस भूमिका से मैं लोगों के सामने रूबरू हुआ। चंडीगढ़ में थियेटर का खास महत्व है। यहां पर थियेटर कलाकारों में परिपक्वता भी आई है। उसकी वजह है नेशनल स्कूल आफ ड्रामा और अन्य नाटकों का मंचन। अब जरूरत इस बात की है कि यहां और नए नाटकों का मंचन भी किया जाए। कपिल कल्याण, डायरेक्टर और एक्टर

नीतू शर्मा, निदेशक, थियेटर हाउस
कहानी से ही प्रेरित होता है नाटक
चंडीगढ़ में मैंने कई नए नाटक किए हैं। वास्तव में नाटक तो किसी प्रसिद्ध कहानी से प्रेरित ही होता है। बेशक चंडीगढ़ में मंचित होने वाले पातर वही रहते हैं पर हरेक नाटक में कुछ न कुछ नया देखने को जरूर मिलता है। कई बार नए डायरेक्टर द्वारा किए जाने वाले पुराने नाटकों में लाइट्स, साउंड और एक्टर और स्टेज का सेटअप चेंज हो जाता है तो कई बार डॉयलाग्स में वेरिएशन आता है। जिससे क्रेज बना रहता है। नीतू शर्मा, निदेशक, थियेटर हाउस
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ऑडियंस ही हिट करती है नाटकों को

कुलदीप शर्मा, आर्टिस्ट और डायरेक्टर, टैगोर थियेटर
मैं चंडीगढ़ में उस समय से नाटकों के मंचन में शुमार हूं जब से यहां थियेटर की शुरुआत हुई थी। अच्छी बात यह है कि यहां की ऑडियंस ही नाटकों को हिट करवाती है। एक समय था जबकि ऑडियंस कम आती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। शनिवार और रविवार की शाम टैगोर थियेटर का हाल किसी सिनेमा थियेटर से कम नहीं होता है। 
कुलदीप शर्मा, आर्टिस्ट और डायरेक्टर, टैगोर थियेटर

थियेटर ग्रुप और कलाकारों की शिद्दत है लाजवाब
सिटी में एक से बढ़कर एक संजीदा थियेटर ग्रुप हैं जो शिद्दत के साथ काम कर रहे हैं। देखा गया है कि नाटक संध्या छाया का मंचन होना हो तो इसकी जानकारी मिलते लोग थियेटर का रुख कर लेते हैं। अलंकार थियेटर का नाटक पोस्टर भी चंडीगढ़ की ऑडियंस का पसंदीदा नाटक है। अलंकार थियेटर के डायरेक्टर चक्रेश कुमार की खूबी यह है कि वह अपने नाटकों के साथ जबरदस्त प्रयोग करते हैं और पोस्टर उसका जीता जागता उदाहरण है। चंडीगढ़ के कलाकारों में अपने एक्ट को बेहतर परफार्म करने की शानदार कला है। यहां किसी भी नाटक के लिए एक या दो दिन नहीं बल्कि एक एक माह की रिहर्सल होती है, जिससे कलाकार अपनी बेस्ट परफारमेंस देता है।

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