चंडीगढ़ नगर निगम ने एक कनाल से बड़े घरों और कमर्शियल बिल्डिंग्स के लिए टीटी वाटर कनेक्शन अनिवार्य कर दिया है। साथ ही शहर में अब टीटी वाटर का इस्तेमाल केवल पार्कों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और कमर्शियल कार्यों के लिए भी किया जा सकेगा।
सदन में प्रस्ताव पारित होने के बाद जिन क्षेत्रों में टीटी वाटर की लाइनें उपलब्ध हैं, वहां के निवासियों को यह कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। कनेक्शन न लेने पर जुर्माने के रूप में बिल में अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जाएगा।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने कहा कि पहले टीटी वाटर का इस्तेमाल सिर्फ पार्कों को पानी देने के लिए होता था, लेकिन अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अच्छे हो गए हैं। इस पानी का इस्तेमाल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और कमर्शियल के लिए भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि निगम ने टीटी वाटर की 437 किलोमीटर की लाइन बिछाई गई है और 165 किलोमीटर की लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जहां-जहां ये लाइनें उपलब्ध हैं, वहां के लोगों को कनेक्शन लेना चाहिए। उन्हें 7 रुपये प्रति किलोलीटर के हिसाब से पैसे चुकाने होंगे। जो कनेक्शन नहीं लेगा, उन घरों पर कुल पानी के बिल का 7.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
चीफ इंजीनियर ने कहा कि पहले नोटिस भेजकर लोगों को बताया जाएगा कि उनके घर के पास से टीटी वाटर की लाइन गुजर रही है। अब तक 364 नोटिस भेजे भी जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां लाइन नहीं है, वह लोगों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। सभी पार्षदों ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया।
बबला-सिद्धू ने पानी की क्वालिटी को लेकर उठाए सवाल
भाजपा पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने सवाल उठाया कि पानी की क्वालिटी अच्छी नहीं है। कई शिकायत आती है और गर्मियों में जब पानी की जरूरत होती है तो पानी ही नहीं आता है। पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि पानी के आने के समय को लेकर भी लोगों को काफी आपत्ति है। पानी छुट्टी के दिन भी आना चाहिए और या तो सुबह सुबह पानी आए या रात तक पानी आए।
दोनों पार्षदों ने पूछा कि क्या यह पानी सुरक्षित है। इस पर चीफ इंजीनियर ने कहा कि अब तक कोई शिकायत नहीं आई है। इस पानी का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, एयर कंडीशनिंग, कूलिंग यूनिट और अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए किया जा सकता है। चीफ इंजीनियर ने कहा कि इसके लिए पूरी एसओपी भी बनाई जाएगी।