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Report: 76 लाख पेड़ों की ऑक्सीजन बर्बाद कर रहा चंडीगढ़ का ट्रैफिक

Sun, 10 Dec 2017 01:47 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Chandigarh Traffic Jam
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चंडीगढ़ में आए दिन बढ़ता जा रहा ट्रैफिक एक वर्ष में 76 लाख वृक्षों द्वारा छोड़ी गई आक्सीजन को बर्बाद कर रहा है। स्थिति संभली नहीं तो हालात बदतर हो जाएंगे। लोगों के लिए सुविधा और शान का प्रतीक बनी आलीशान कारें शहर की स्वच्छ वायु का गला घोट रही हैं। एक वृक्ष हमारे लिए एक वर्ष में जितनी आक्सीजन छोड़ता है वह एक कार एक सप्ताह चलने में ही समाप्त कर देती है।
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इसके मायने यह हुए कि चंडीगढ़ में मौजूद वाहन एक वर्ष में 76 लाख वृक्षों द्वारा छोड़ी गई आक्सीजन को बर्बाद कर रहे हैं। आंकड़े पंजाब के ट्रैफिक एडवाइजर की स्टडी से सामने आए हैं। पंजाब के ट्राफिक एडवाइजर नवदीप असीजा द्वारा की गई स्टडी से पर्यावरण प्रेमियों की आंखें खुली की खुली रह जाएंगी।

स्टडी के अनुसार एक हरे-भरे परिपक्व वृक्ष से एक साल में जितनी अक्सीजन पैदा होती है, कार एक सप्ताह चलने के लिए उस आक्सीजन को बर्बाद कर देती है। एक कार के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए करीब 52 वृक्षों की आक्सीजन खर्च होती है। इन आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आता है कि चंडीगढ़ में मौजूद ट्रैफिक साल भर में 76 लाख पेड़ों द्वारा पैदा की गई आक्सीजन को बर्बाद कर देती हैं।
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साल भर में 2194.8 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल का इस्तेमाल

Chandigarh Traffic Jam - फोटो : File Photo
उन्होंने कहा कि वर्तमान में यदि एक कार पर पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रुपये में आंकते हुए तुलना करें तो एक कार 52 वृक्षों द्वारा साल भर में पैदा की गई आक्सीजन एक साल में इस्तेमाल करती है। इस आक्सीजन की यदि रुपये में कीमत निकाले तो यह लगभग 3500 रुपये प्रतिमाह है। साथ ही असीजा ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि चंडीगढ़ में 2194.8 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल का इस्तेमाल साल भर में होता है।

हर रोज करीब 6 लाख लीटर तेल की खपत चंडीगढ़ में होती है। एक लीटर तेल को जलाने में करीब 15.2 किलो फ्रेश एयर की जरूरत होती है। इसमें से 23 फीसदी आक्सीजन होती है। एक परिवक्व वृक्ष साल भर में 100 किलो आक्सीजन पैदा करता है। ऐसे में एक वृक्ष द्वारा एक साल में पैदा की गई आक्सीजन एक कार द्वारा एक सप्ताह चलने के खर्च हो जाती है।

रोजाना इतना तेल होता इस्तेमाल, धरती के लगाए जा सकते हैं 150 चक्कर
असीजा ने बताया कि चंडीगढ़ रोजना 6 लाख लीटर तेल की खपत होती है। यह खपत इतनी है कि यदि किसी वाहन में इतना तेल डाला जाए तो वह धरती के रोजाना 150 चक्कर लगा सकती है। ऐसे में कारों को प्रमोट करने के स्थान पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रमोट करना चाहिए। क्योंकि पब्लिक और प्राईवेट ट्रांसपोर्ट को एक साथ प्रमोट नहीं किया जा सकता।
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बढ़ रहे वाहन और प्रदूषण बड़ी चुनौती

Chandigarh Traffic
असीजा ने कहा कि लगातार शहर में वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे एक ओर तो शहर में ट्रैफिक की समस्या और अधिक विकट होती जा रही है वहीं दूसरी ओर पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। हालात यही रहे तो वह समय दूर नहीं जब हालात काबू से बाहर हो जाएंगे और तब चाह कर भी कुछ नहीं किया जा सकेगा।

साइकिल है बेहतर विकल्प
शहर में जिस प्रकार प्रदूषण बढ़ रहा है उसने एक बार फिर से साइकिल की आवश्यकता को बल दिया है। जहां एक ओर प्रशासन द्वारा साइकिल सवारों के लिए बेहतर ट्रैक तैयार कर दिए गए हैं वहीं साइकिलिंग के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने को हाईकोर्ट के जज भी पहल कर चुके हैं।

अभी कुछ समय पूर्व ही हाईकोर्ट के सभी जजों ने पैदल और साइकिल पर हाईकोर्ट आने का फैसला लिया था। इसके द्वारा उन्होंने आम लोगों के साथ ही अधिकारियों को भी साइकिलिंग अपनाने का संदेश दिया था।
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