सीमित जमीन और बढ़ती आबादी के दबाव से जूझ रहे चंडीगढ़ में अब सिंगापुर मॉडल पर प्रॉपर्टी मैनेजमेंट की तैयारी शुरू हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन लिमिटेड लैंड, अनलिमिटेड स्पेस की अवधारणा को समझने के लिए सिंगापुर के कंसेप्ट का अध्ययन करेगा। हाईराइज बिल्डिंग नेटवर्क, पानी-बिजली की स्मार्ट सप्लाई, ट्रैफिक प्रबंधन, डिजिटल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान रहेगा। इसे लेकर डीसी निशांत कुमार यादव और नगर निगम आयुक्त अमित कुमार एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत सिंगापुर पहुंचे हैं। वहां वे शहरी भूमि प्रबंधन, संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सुव्यवस्थित विकास मॉडल का अध्ययन करेंगे।
27 हजार एकड़ में डिजिटल नेटवर्क संभाल रहा सिंगापुर
सिंगापुर लैंड अथॉरिटी (एसएलए) करीब 11 हजार हेक्टेयर यानी 27,181 एकड़ क्षेत्र में फैले हाईराइज और प्रॉपर्टी नेटवर्क का प्रबंधन करती है। खास बात यह है कि वहां संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल और कानूनी रूप से सुरक्षित है। खरीद-फरोख्त, ट्रांसफर, सरकारी देय, कानूनी विवाद सभी प्रक्रियाएं तकनीक आधारित और पारदर्शी हैं। चंडीगढ़ का कुल क्षेत्रफल लगभग 114 वर्ग किलोमीटर (करीब 28,170 एकड़) है, जिसमें 25 गांव भी शामिल हैं। क्षेत्रफल की समानता को देखते हुए प्रशासन यह समझना चाहता है कि सिंगापुर ने सीमित जमीन में सुव्यवस्थित हाईराइज विकास और मजबूत रिकॉर्ड सिस्टम कैसे स्थापित किया।
नक्शा और लैंड स्टैक में डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा
शहर में नक्शा पायलट प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर-2 से 17 तक लगभग 7,000 रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब तक करीब 5,200 संपत्तियों का सर्वे और डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। लगभग 20 फील्ड टीमें प्रतिदिन सर्वे में लगी हैं। इसके साथ लैंड स्टैक प्रोजेक्ट के जरिये शहर की हर संपत्ति का एकीकृत डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। लक्ष्य है कि एक क्लिक पर प्रॉपर्टी का स्वामित्व, ट्रांसफर, नक्शा पास, देय राशि और विवाद संबंधी जानकारी उपलब्ध हो।
हेरिटेज पाबंदियों के बीच हाईराइज पर ध्यान
सेक्टर-1 से 30 तक हेरिटेज पाबंदियों के चलते संरचनात्मक बदलाव संभव नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन की नजर दक्षिणी सेक्टरों और सेक्टर-31 के बाद के क्षेत्रों पर है जहां नियमानुसार हाईराइज विकास की संभावना है। एक्सचेंज प्रोग्राम में यह भी अध्ययन होगा कि ऊंची इमारतों में पानी-बिजली की स्मार्ट सप्लाई, ट्रैफिक मूवमेंट और हरित क्षेत्र संतुलन कैसे सुनिश्चित किया जाए।
लोगों को क्या होगा लाभ
यदि सिंगापुर मॉडल लागू होता है तो किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। डिजिटल और सत्यापित रिकॉर्ड से फर्जीवाड़ा, अवैध कब्जे और विवादित प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगेगा। सेल-परचेज के दौरान दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन पारदर्शिता बढ़ाएगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि मॉडल अपनाने से पहले स्थानीय सामाजिक, कानूनी और वित्तीय चुनौतियों का आकलन जरूरी होगा। जमीन की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे का दबाव और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनानी होगी। फिलहाल प्रशासन अध्ययन के चरण में है लेकिन संकेत साफ हैं चंडीगढ़ अब पारंपरिक सेक्टर प्लानिंग से आगे बढ़कर स्मार्ट, डिजिटल और ऊर्ध्वाधर विकास की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में है।