चंडीगढ़ की लाइफलाइन सुखना लेक को बचाने के लिए हरियाणा, पंजाब, यूटी और केंद्र के 6 अफसरों की स्पेशल टीम तैयार की गई है। इस टीम को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि सुखना को बचाने के लिए जो सुझाव आए हैं, उनको अपनी कसौटी पर परख कर कोर्ट को सूचित किया जाए। खास बात यह है कि केंद्र सरकार सहित पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के प्रतिनिधियों के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के एक वैज्ञानिक को भी कमेटी में शामिल किया गया है।
कमेटी की शनिवार को दोपहर 12 बजे यूटी गेस्ट हाऊस में बैठक होगी। इस बैठक के दौरान सुखना लेक के सामने मौजूद समस्याओं को सांझा किया जाएगा और इसके संभावित उपायों के बारे में चर्चा की जाएगी। वर्तमान में गाद निकालना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस बैठक में जो भी निर्णय लिए जाएंगे, उसके मिनट्स एक जून को मामले की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को सौंपे जाएंगे। खास बात यह रहेगी कि यदि इस दौरान कमेटी के सदस्यों को सुखना का दौरा करने की जरूरत पड़ी तो हाईपावर कमेटी सीधा लेक पर पहुंचेगी और निरीक्षण करेगी।
छह सदस्यीय कमेटी में शामिल सदस्य
सुखना लेक
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निदेशक अशोक गुप्ता, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनएचआई) के वैज्ञानिक सुहास खोब्रागडे, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस कमेटी में इंजीनियरिंग विभाग के सचिव अनुराग अग्रवाल, पंजाब की ओर से सिंचाई विभाग के सचिव राहुल तिवारी और हरियाणा की ओर से सिंचाई और जल संसाधन विभाग के सचिव आरएस वर्मा कमेटी में शामिल हैं।
जेसीबी और बुल्डोजर की संभावना की खारिज
पिछली सुनवाई पर लेक से गाद निकालने के लिए जेसीबी और बुल्डोजर से इसकी सफाई का जो सुझाव दिया गया था, उस पर वीरवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चर्चा की गई। इसमें सामने आया कि कई जगहों पर लेक में पानी चाहे कम है, लेकिन लेक की स्थिति ऐसी है कि इसमें जेसीबी और बुल्डोजर नहीं चलाए जा सकते हैं। अगर ऐसा किया गया तो उनके फंसने की संभावना अधिक है। इसके बाद यही निर्णय लिया गया कि लेक की सफाई में लेबर को ही लगाया जाए।