चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी परियोजना में नगर निगम पटेल मार्केट को मॉडल फूड स्ट्रीट बनाना चाहता है, लेकिन बिजली के लटकते तारों का गुच्छा बाधा बन रहा है। दुकानदारों का कहना है कि कुछ दिन पहले मार्केट के पास लगे ट्रांसफार्मर में आग लगने के बाद एक दुकान में नुकसान हो गया था। उसके बाद बिजली विभाग ने नए तार डालकर मीटर एक बॉक्स में लगा दिए हैं। वहीं तारों को ऊपर एक साथ बांध दिया है। किसी भी दुकान का तार खराब हुआ तो उस गुच्छे में अपने तार को पहचानना दुकानदार के लिए मुश्किल भरा होगा। दूसरी ओर दुकान से मीटर की दूरी बढ़ गई तो अब उस केबल का खर्च भी दुकानदार को वहन करना होगा। जब मार्केट स्मार्ट होनी है तो तारों को अंडरग्राउंड क्यों नहीं किया गया।
दुकानदारों ने कहा कि स्मार्ट सिटी तारों को अंडरग्राउंड करने की बात कर रहा है, लेकिन चल पुराने ढर्रे पर रहा है। बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर से नए तार तो डाल दिए, लेकिन उन्हें एक गुच्छे बनाकर ऊपर लटका दिया है। दूसरी ओर मीटर दुकानों के सामने से निकालकर बॉक्स में लगा दिए हैं। एक बॉक्स में लगभग 20 से ज्यादा मीटर हैं। एक मीटर में आग लगी तो सभी खराब होंगे। दूसरी ओर बिजली विभाग के अनुसार मीटर से आगे निकलने वाले तार का खर्च उपभोक्ता को देना होता है। कई दुकानों की मीटर से दूरी 30 से 50 मीटर तक हो गई है। ऐसे में उनके ऊपर और खर्च बढ़ गया है। दुकानदारों ने बताया कि वर्ष 1992 में मार्केट बनी थी तबसे अब तक यहां तार नहीं बदले गए थे।
स्मार्ट सिटी परियोजना से बनना है मॉडल फूड स्ट्रीट
दुकानदारों ने कहा कि पटेल मार्केट में पीछे की तरफ ढाबे और अन्य खानपान की दुकानों का सौंदर्यीकरण किया जाना है। यहां तारों को अंडरग्राउंड करने से लेकर फुटपाथ, लोगों के सेल्फी स्टैंड सहित कई काम होने हैं, लेकिन मार्केट के सामने से झूलते बिजली के तार तो मार्केट की सुंदरता पर धब्बे का काम करेंगे। वहीं जब लोग यहां आएंगे तो उनकी जान का खतरा भी बना रहेगा। जब पूरे शहर में तारों को अंडरग्राउंड करने का काम होना है तो यह दो बार रुपये बर्बाद करने का क्या फायदा।
कोट-
तार अंडरग्राउंड होने चाहिए थे। दुकानदारों की मांग बिल्कुल सही है। इसके लिए प्रशासन से बातचीत करेंगे। मॉडल फूड स्ट्रीट में इसका प्रावधान है इसलिए इसे आपसी तालमेल से पहले ही कराने का प्रयास करेंगे।
- सौरभ जोशी, क्षेत्रीय पार्षद
हमने तारों को पहले से ज्यादा मोटा कर दिया है। पहले तारों से ही दुकानदारों की तिरपाल छूती रहती थी। इससे खतरा रहता था इसलिए तारों को ऊपर इकट्ठा करके बांध दिया है।
- बलवीर, एसडीओ, बिजली विभाग