देश के स्वच्छ शहरों की सूची में चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर है। इसके बावजूद शहरवासियों का कहना है कि अगर नगर निगम प्रयास करता तो पहले स्थान पर भी आ सकता था। लोगों का कहना है कि डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने का सिस्टम निगम को अपने हाथ में लेना चाहिए, जो अभी निजी हाथों में हैं।
फासवेक के अध्यक्ष बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि चंडीगढ़ पहले नंबर पर आ सकता था, लेकिन यहां सफाई के जिस तकनीक और मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह कई साल पुरानी है। सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है।
शहर के बाहरी इलाकों का बुरा हाल है। प्रवेश द्वार पर भी गंदगी रहती है। उनका कहना है कि प्रवेश द्वार को सुंदर बनाने के साथ यहां पर सूचना केंद्र बनाए जाने चाहिए। गांव और कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरणजीव सिंह का कहना है कि सभी बाजारों में डस्टबीन लगाए जाने चाहिए।
मैसूर को स्टडी करेगा निगम
स्वच्छ शहरों की सूची में नंबर दो पर आने के बावजूद निगम के अधिकारियों और पार्षदों का दावा है कि वह अगली बार पहले स्थान पर आने का प्रयास करेंगे। इसके लिए नंबर एक पर आने शहर मैसूर की सेनिटेशन सिस्टम का अध्ययन करने जाएंगे। वहां की व्यवस्थाओं को चेक कर उन्हें शहर में लागू करवाने का प्रयास किया जाएगा।
अब भी सुधार की काफी जरूरत
शहर में कूड़ा ले जाने के लिए जिन गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी हालत खस्ता है। कूड़ा ओपन में लेकर जाया जाता है, इस कारण सड़क पर गिरता है और वहां से दुर्गंध आती है। हाल ही में व्यवस्था को सुधारने के लिए पार्षदों व अधिकारियों का एक दल नोएडा और दिल्ली स्टडी टूर पर गया था। टूर पर गए पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि वहां पर कूड़ा ले जाने वाली गाड़ियां ओपन नहीं हैं।
इस सिस्टम को शहर में लागू करने का प्रयास किया जाएगा। यहां पर डोर टू डोर कूड़ा इकट्ठा करने का सिस्टम ठीक नहीं है। नगर निगम की ओर से यह काम निजी हाथों को सौंपा गया है। इस कारण जो कूड़ा प्रोसेस के लिए गारबेज प्लांट पहुंचना चाहिए, वह नहीं पहुंच पा रहा है।
3649 खुले में कर रहे शौच
निगम ने हाल ही में सर्वे करवाया है। इसके अनुसार शहर में 3694 लोग खुले में शौच जा रहे हैं। इनमें 2159 पुरुष, 861 महिलाएं और 674 बच्चे हैं। सर्वे में कॉलोनी और गांव के साथ सेक्टरों के लोग भी शामिल हैं। जिनके घर में टायलेट हैं, लेकिन आदतन वह खुले में शौच करते हैं।
प्रतिदिन 350 टन कूड़ा उठता है
शहर से प्रतिदिन 350 कूड़ा उठता है। इसमें से 250 टन कूड़ा प्रोसेस के लिए गारबेज प्लांट में जाता है, जबकि 80 टन डंपिंग ग्राउंड में जाता है, जो प्रोसेस नहीं हो रहा है। नगर निगम आधुनिक तकनीक अपना कर इसे भी प्रोसेस कर सकता है।
स्वच्छ भारत के तहत जल्द आएगी ग्रांट
शहर के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत अभियान के तहत एक करोड़ 70 लाख रुपये की ग्रांट पास की गई है। मेयर अरुण सूद के हस्तक्षेप के बाद जल्द ही यह ग्रांट शहर को मिलने जा रही है।
कोट..
शहर के लिए यह अवार्ड गौरवपूर्ण है। हम 21वें स्थान से दूसरे नंबर पर स्वच्छता में आ गए हैं। पहले नंबर पर आने में जिस-जिसमें कम अंक आए हैं, उनका अध्ययन कर उन कमियों को दूर करेंगे।
- बी पुरुषार्था, कमिश्नर, चंडीगढ़ नगर निगम