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ये दो पाकिस्तानी महिलाएं न करती मदद तो वतन नहीं लौट पाते हामिद अंसारी... जज्बे को सलाम

Wed, 19 Dec 2018 03:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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हामिद निहाल अंसारी
भारतीय नागरिक हामिद अंसारी छह साल के बाद पाकिस्तान से अपने वतन लौट आए हैं। इस लड़ाई में हामिद का साथ कई लोगों ने दिया। उनमें से सबसे हम पाकिस्तान की दो महिलाएं थी। जिन्होंने हर कदम पर हामिद का साथ दिया। आइए जानते हैं इन महिलाओं के बारे में...
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Hamid Nehal Ansari
मंगलवार को हामिद अंसारी की पाकिस्तान से भारत वापसी हुई है। अपने बेटे को लेने के लिए पूरा परिवार अटारी-वाघा बॉर्डर पर दोपहर से ही मौजूद रहा। बेटे की झलक देखते ही मां समेत पूरा परिवार रो पड़ा। हामिद मुंबई के रहने वाले हैं। बता दें कि 2012 में फेसबुक पर बनी एक महिला मित्र से मिलने के लिए हामिद पाकिस्तान गए थे। जहां पाकिस्तान के कोहाट में जासूसी और बिना दस्तावेज के आरोप में हामिद को गिरफ्तार कर लिया गया था।
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Hamid Nehal Ansari
हामिद कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से अफगानिस्तान के तोरखम के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए थे। हामिद जिस लड़की की तलाश में पाकिस्तान आए थे, वो लड़की खैबर पख्तून्ख्वा के कोहाट की रहने वाली थी। पाकिस्तान में हामिद अंसारी की मदद वकील रख्शंदा ने की। हामिद की पूरी लड़ाई में यह नाम बेहद अहम है। रख्शंदा पाकिस्तान मानवाधिकार मामलों की वकील हैं। इन्होंने ही हामिद की रिहाई का केस लड़ा। रख्शंदा ने कहा कि मुझे हामिद के बारे रीता मनचंदा से पता चला, जो भारत में समाजसेवी हैं। हालांकि पाकिस्तानी पत्रकार जीनत शहजादी ने इस केस के लिए कोर्ट में अपील की थी। 

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Hamid Nehal Ansari
मैं उस वक्त तीन साल से पाकिस्तान में नहीं थी। जब मैं आई तो जीनत भी पाकिस्तान में नहीं थी। तब से मैं हामिद के साथ संपर्क में हूं। मेरी उनके परिवार से बात हुई और उनकी मां को तब विश्वास हुआ कि उनका बेटा जिंदा है। वहीं दूसरा सबसे अहम नाम जीनत है। जीनत पेशे से पत्रकार हैं। जीनत ने इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग कर इस केस की सारी जानकारी जुटाई थी। उसके बिना हामिद के बारे में किसी को पता नहीं चलता। इन दोनों महिलाओं की मदद से ही हामिद आज वतन वापस आ सके हैं। 
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हामिद निहाल अंसारी
यह दिन हमारे लिए ईद जैसा 
हामिद के परिवार ने दोनों मुल्कों की सरकार का शुक्रिया किया और कहा, यह दिन हमारे लिए ईद जैसा है। हामिद की मां फौजिया ने कहा, सरकार ने इस मामले पर पहले दिन से ही हमारी मदद की। मीडिया हमारी आवाज बना। अरविंद शर्मा नाम के वकील ने बिना फीस के सुप्रीम कोर्ट तक हमारा केस रखा। फौजिया ने अपने बेटे का स्वागत चॉकलेट से किया। उन्होंने कहा, मेरे बेटे को चॉकलेट बहुत पसंद है, इसलिए मैं उसके लिए चॉकलेट लेकर आई हूं। फौजिया ने अपने बेटे का स्वागत चॉकलेट से किया। उन्होंने कहा, मेरे बेटे को चॉकलेट बहुत पसंद है, इसलिए मैं उसके लिए चॉकलेट लेकर आई हूं।
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