इंटरनेट सेवा निलंबित कर वाईफाई और ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा को जारी रखना मोबाइल डाटा पर आश्रित लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। क्योंकि यह समानता के
अधिकार का हनन करता है। इस मामले में दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता नीरज ने हाईकोर्ट को बताया कि किसी आंदोलन को बढ़ने से रोकने व कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट सेवा को निलंबित करने का निर्णय लेती है। पंजाब में अमृतपाल की गिरफ्तारी के लिए पंजाब सरकार ने अभियान चलाते हुए तीन दिन तक इंटरनेट सेवा को बंद रखने का निर्णय लिया था।
इस दौरान केवल मोबाइल इंटरनेट सेवा को निलंबित किया गया था, जबकि वाई फाई व ब्रॉडबैंड के माध्यम से इंटरनेट सेवा जारी थी। याची ने कहा कि इंटरनेट सेवा निलंबित करने का समाज के उस वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो पूरी तरह से मोबाइल इंटरनेट डाटा पर निर्भर है।