चंडीगढ़ प्रशासन ने बुधवार को आदेश जारी कर प्राइवेट स्कूलों के इस सत्र 2020-21 में फीस बढ़ाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले को लेकर पैरेंट्स की ओर से पूछे गए सवालों को अमर उजाला ने शिक्षा निदेशक रुबिंदरजीत सिंह बराड़ और इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एचएस मामिक से पूछा।
प्राइवेट स्कूल प्रशासन ने फैसले को नकारते हुए हाईकोर्ट में चैलेंज करने की बात कही है। साथ ही कहा है कि फीस लेना अधिकार है। वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों को 15 जून तक की मोहलत दी गई है। नियमों की अनुपालना न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।
सवाल : प्रशासन के 18 मई के फैसले के अनुसार जो परिजन 31 मई से पहले स्कूलों की ओर से सेशन की बढ़ाई हुई फीस जमा कर चुके हैं, क्या उन्हें जमा की अतिरिक्त धनराशि वापिस की जाएगी ?
निदेशक बराड़ : नहीं.. हम फीस वापस नहीं करवा सकते। परिजनों की ओर से फीस के रूप में जमा की गई अतिरिक्त धनराशि को अगले महीनों की ट्यूशन फीस में एडजस्ट किया जाएगा।
एचएस मामिक : स्कूल किसलिए फीस रिफंड करेंगे। शिक्षा विभाग ने खुद 18 मई को आदेश जारी कर फीस लेने की अनुमति दी थी। विभाग खुद अपने आदेशों पर नहीं कायम है। फीस को लेकर तीन बार आदेश दिए जा चुके हैं, जबकि यह हमारा अधिकार है।