नाबालिगों से जुड़े आपराधिक मामलों में पुलिस कितनी गंभीर है, इस बात का अंदाजा चंडीगढ़ पुलिस की इस हरकत से लगाया जा सकता है। एक नाबालिग के अपहरण, दुराचार और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में पुलिस ने 90 दिन के अंदर चालान तो दायर कर दिया लेकिन दूसरी कोर्ट में। अब इसे आधार बनाकर केस के तीनों आरोपियों ने सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत जमानत के लिए याचिका दायर की है। अदालत ने थाना पुलिस को बुधवार तक के लिए नोटिस किया है।
पुलिस के जवाब के बाद अदालत जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी। बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट अमर सिंह चहल व अन्य ने तीनों आरोपियों सुरेश, शंकर और कमल की जमानत के लिए याचिका दायर की है। आरोपियों की ओर से जमानत का आधार पुलिस द्वारा 90 दिन के अंदर चालान दायर न करने को बनाया गया है। याचिका के अनुसार सेक्टर-36 थाना पुलिस ने तय समय सीमा के अंदर चालान दायर कर दिया है, लेकिन चालान गलत कोर्ट में दायर किया गया है
इसलिए गलत कोर्ट में चालान दायर करना न दायर करने के बराबर है। इस आधार पर आरोपी जमानत के हकदार हैं। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई है कि पॉक्सो एक्ट 33 के तहत पॉक्सो एक्ट के केस में केवल स्पेशल कोर्ट में ही चालान दायर किया जाता है। पॉक्सो एक्ट के मामलों पर सुनवाई इलाका मजिस्ट्रेट या सिविल जज की ज्यूरिडिक्शन में नहीं आते हैं। इन मामलों की महिला और बाल अपराध के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष कोर्ट में ही सुनवाई हो सकती है।
इस मामले में पुलिस ने इलाका मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चालान दायर किया है। बता दें कि पहले भी ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जब नाबालिग या युवतियों से दुराचार, छेड़छाड़ या अन्य तरह की गंभीर प्रवृति के आपराधिक मामलों में पुलिस द्वारा समय से चालान दायर न करने पर आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे मामलों में अदालत ऐसे पुलिस कर्मियों के खिलाफ एसएसपी को कार्रवाई करने को लिख चुका है। इसके बावजूद नाबालिगों और महिला अपराध से जुड़े मामलों में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आती रहती है।
यह है मामला
27 अक्तूबर 2017 को रामदरबार इलाका निवासी व्यक्ति ने सेक्टर-36 थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी साढ़े 16 साल की बेटी सेक्टर-42 स्थित एक कालेज में में पढ़ती है। कॉलेज की छुट्टी होने के बाद बेटी घर नहीं आई तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका। उन्होंने रामदरबार निवासी कमल जोशी और उसके दो साथियों पर शक जताते हुए उनके खिलाफ बेटी को अगवा करने की शिकायत दी।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर कमल जोशी, सुरेश कुमार और शंकर को 30 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से नाबालिग को बरामद कर लिया। नाबालिग ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि तीनों युवकों ने उसे कॉलेज के पास से बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया था। इसके बाद कमल ने उससे दुराचार भी किया था। बाद में पुलिस ने केस में नाबालिग से दुराचार पर पॉक्सो एक्ट 4 और 6 भी जोड़ दी थी।