चोरी, झपटमारी, लूटपाट, दुष्कर्म, धोखाधड़ी, हत्या के प्रयास व हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले भगोड़े अपराधी चंडीगढ़ पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। बड़ी संख्या में भगोड़े पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं, जिन्हें दबोचने के लिए यूटी पुलिस ने विशेष योजना बनाई है। इसके लिए एसएसपी अब पीओ सेल के हर पुलिसकर्मी से टारगेट बेस्ड रिजल्ट हासिल करने की तैयारी में हैं। यूटी पुलिस ने बीते तीन साल में कुल 424 भगोड़ों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। वर्ष 2016 में पीओ सेल और थाना पुलिस ने संयुक्त प्रयास से कुल 177 भगोड़े आरोपियों को दबोचा। वर्ष 2017 में 105 भगोड़े पुलिस के हाथ चढ़े।
वहीं, इस वर्ष अब तक कुल 142 भगोड़े आरोपियों की धरपकड़ की जा चुकी है। आगामी दो महीने में एसएसपी निलांबरी विजय जगदले ने पीओ सेल व थाने के पुलिसकर्मियों से निर्धारित समय सीमा में टारगेट बेस्ट रिजल्ट लेने की योजना बनाई है क्योंकि अभी तक कुल 3640 भगोड़े पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। खास बात यह है कि कई भगोड़ों की धरपकड़ करने वाले पुलिसकर्मी व पुलिस टीम को उनकी परफार्मेंस के आधार पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। वहीं, लंबे समय से पीओ सेल में जमे पुलिसकर्मियों की छमाही और वार्षिक वर्किंग रिपोर्ट में उनकी परफार्मेंस कमजोर होने पर उन्हें पुलिस लाइन व अन्य यूनिट्स में स्थानांतरित भी किया जा सकता है।
चार भगोड़ों को लुकआउट नोटिस, पकड़वाने पर 25 हजार इनाम
अदालत से भगोड़ा करार दिए गए चार आरोपियों की तलाश समूची यूटी पुलिस को है। इन भगोड़े आरोपियों की धरपकड़ के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है। साथ ही महिला समेत दो भगोड़ों को पकड़वाने पर 25 हजार रुपये इनामी राशि भी रखी गई है। खास बात है कि भगोड़े की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाएगी। इन भगोड़े आरोपियों में पहला सेक्टर-3 थाने में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के भतीजे अकांक्ष हत्याकांड मामले में फरार आरोपी बलराज सिंह रंधावा है।
आरोप के मुताबिक हत्यारोपी बलराज सिंह रंधावा ने अकांक्ष सेन को बीएमडब्ल्यू कार से कुचला था। दूसरा भगोड़ा थाना मौलीजागरां में धोखाधड़ी के तहत दर्ज केस का आरोपी मोहम्मद शब्बीर है। इनके अलावा आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद सेक्टर-39 थाने में योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी के तहत दर्ज केस में भगोड़ा दंपती मूलरूप से हिसार के मॉडल टाउन निवासी आशीष गोयल व उसकी पत्नी सुनीता गोयल हैं। इन भगोड़ों की सूचना देने वालों को 25 हजार रुपये की इनामी राशि दी जाएगी।
पीओ सेल में कुल 54 पुलिसकर्मी
वर्तमान समय में पीओ सेल में कुल 54 पुलिसकर्मी हैं। इनमें एक एसआई, 32 हेड कांस्टेबल और 21 कांस्टेबल हैं। विभाग जल्द ही पीओ सेल में स्थायी तौर पर एक इंस्पेक्टर स्तर के पुलिसकर्मी को भी नियुक्त कर सकता है, ताकि सेल के पुलिसकर्मियों की ड्यूटी से लेकर उनकी मासिक व वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर उनकी परफार्मेंस का आकलन किया जा सके।
पुलिस के सामने चुनौतियां
किसी एक भगोड़े की धरपकड़ व उसके सुराग के लिए जमीनी स्तर काम करने पर भी एक सप्ताह से 15 दिन व कई बार महीने भर का समय लग जाता है।
छापामारी के दौरान थोड़ी सी देर होने पर भी पूरे समय की मेहनत खराब हो जाती है।
भगोड़े आरोपियों के मोबाइल नंबर व उनके आईपी एड्रेस समेत अन्य गैजेट्स का रिकॉर्ड न होने के चलते उनकी धरपकड़ में देरी होती है।
भगोड़े आरोपी अकसर अपना हुलिया बदलने सहित असल पहचान छिपाकर रहते हैं। इससे भी उन्हें दबोचने में मुश्किल होती है।
पुलिस थानों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी व पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक बनाने सहित पीओ सेल के पुलिसकर्मी भगोड़े आरोपियों की धरपकड़ पर फोकस कर रहे हैं। भगोड़े आरोपियों की धरपकड़ को विशेष योजना बनाई गई है।
- निलांबरी जगदले, एसएसपी, यूटी पुलिस