आम जनता की शिकायतें सुलझाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली चंडीगढ़ पुलिस खुद अपनी व्यवस्था और आधुनिकीकरण के मामलों में कितनी लापरवाह है, इसका बड़ा खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
डैशबोर्ड कैमरे, कमांड एंड कंट्रोल वाहन, बुलेटप्रूफ जैकेट, प्रिजन वैन और फॉरेंसिक किट के लिए फंड जारी हुआ, लेकिन खर्च आंशिक रहा। डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए 2.94 करोड़ स्वीकृत हुए, लेकिन एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। 1930 साइबर हेल्पलाइन के 33.45 लाख में केवल 12.62 लाख खर्च हुए और वर्कस्टेशन, सर्वर व कॉल सेंटर के लिए 20.83 लाख बिना उपयोग पड़े।
217 विभागीय वाहनों का ईंधन औसत तय नहीं, जिससे खर्च पर नियंत्रण नहीं। सेक्टर-18 स्थित पुरानी सरकारी प्रेस बिल्डिंग की बिजली हिस्सेदारी 3.92 लाख लंबित।
कमांड एंड कंट्रोल वाहन, कैमरे और जैकेट: 25 लाख में सिर्फ 2.35 लाख खर्च।
प्रिजन वैन और फॉरेंसिक किट: 30 लाख में 20.50 लाख खर्च, 9.50 लाख बचे।
1930 साइबर हेल्पलाइन: 33.45 लाख में 12.62 लाख खर्च।
डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम: 2.94 करोड़ में एक रुपया भी खर्च नहीं।
कई मद में मिले बजट उसकी कार्य योजना से काफी कम हैं, इसलिए उसे अब तक खर्च नहीं किया जा सका। जैसे फोरेंसिक किट की खरीद के लिए पैसे कम थे, उतने बजट में तय संख्या में किट नहीं खरीदी जा सकती थी। वहीं डिजिटाइजेशन ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए 20 करोड़ का बजट तय है, जिसमें 17 करोड़ प्रशासन ने दिए हैं, बाकी बजट हमारा है। अन्य कार्यों के लिए मिले बजट को भी संशोधित कर उसका बढ़ा बजट मांगा गया है। केंद्र से मिलते ही इसे तय योजना के अनुसार खर्च किया जाएगा। -मंजीत श्योराण, एसएसपी हेडक्वार्टर