चंडीगढ़ पीजीआई की कैंसर रजिस्ट्ररी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां हर दूसरे दिन लंग कैंसर के तीन मरीज आते हैं। साल दर साल उनके केसों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
साल 2014 में लंग्स कैंसर के कुल 460 मरीज आए थे, जबकि 2015 में 568 मरीज। इस हिसाब से पीजीआई में हर दूसरे दिन पीजीआई में लंग्स कैंसर के तीन नए मरीज सामने आ रहे हैं, जो काफी चिंताजनक बात है।
यदि साल 2010 से लेकर 2013 के आंकड़ों पर नजर डालते तो इन सालों में भी लंग्स कैंसर की काफी मरीज आए थे। तीन सालों में कुल 1092 मरीज दर्ज किए गए। इसी तरह से मुंह के कैंसर के केस भी लगातार बढ़े हैं। साल 2014 में मुंह के कैंसर के कुल 443 मरीज थे, जबकि 2015 में 507 मरीज।
क्या कारण हैं लंग्स कैंसर के
पीजीआई रेडियोथैरेपी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर राकेश कपूर के मुताबिक लंग्स कैंसर के मुख्य कारण स्मोकिंग और प्रदूषण है। उनसे जब पूछा गया कि कितने मरीज प्रदूषण के कारण कैंसर शिकार हुए तो उनका कहना था कि अलग-अलग मरीजों की संख्या बता पाना तो मुश्किल होगा, लेकिन इनकी संख्या कम नहीं है।
इससे बचने का एक मात्र रास्ता यही है कि लोगों को स्मोकिंग नहीं करना चाहिए। यदि कोई स्मोकिंग भी कर रहा हो तो वहां से दूर चले जाना चाहिए या उन्हें मना करना चाहिए। यदि कोई मरीज प्रदूषित शहर में रह रहा है तो वह जब भी घर से बाहर निकले तो चेहरे पर मास्क लगाकर निकले।
ल्यूकेमिया व ब्रेन कैंसर का ग्राफ गिरा
पीजीआई कैंसर रजिस्ट्ररी के मुताबिक ल्यूकेमिया व ब्रेन कैंसर के मरीजों में गिरावट दर्ज की जा रही है। इसमें खासतौर पर ल्यूकेमिया व ब्रेन कैंसर शामिल है। विशेषज्ञों ने बताया कि इसके कम होने की खास वजह तो सामने नहीं आई है, लेकिन जागरुकता तो कैंसर के लिए बढ़ी रही है। लंग्स कैंसर बढ़ने की वजह पर विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के प्रति जागरुकता बढ़ी है। सर्विलांस सिस्टम काफी अच्छा हुआ है।
कैंसर---------2014----प्रतिशत------2015---प्रतिशत
लंग-----------460------11.8-------568----14.5
मुंह का कैंसर---443------11.4-------507----13.0
ल्यूकेमिया------345-------8.9--------325-----8.3
यूरिनेरी ब्लडेर--136--------3.5-------100------2.6