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पीजीआई ने मांगे 2050 करोड़, मिले 1613.82 करोड़

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चंडीगढ़। पीजीआई को एक बार फिर आम बजट ने निराश ही किया है। सरकार ने इस साल फिर पीजीआई को उसके प्रस्तावित मांग से कम बजट दिया है। पीजीआई ने इस वर्ष सरकार से 2050 करोड़ रुपये के बजट की मांग की थी पर इसमें से 1613.82 करोड़ रुपये मिले हैं, जो प्रस्तावित बजट से 22.32 प्रतिशत कम है। हालांकि प्रस्तावित बजट से कम स्वीकृत किए जाने से पीजीआई प्रशासन पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। पीजीआई के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष के अंत में जब कभी उन्हें बजट की कमी महसूस होती है वह सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग कर लेते हैं, उस स्थिति में सरकार उनकी भरपूर मदद भी करती है। ऐसी स्थिति में बजट की कमी के कारण पीजीआई में कोई भी कार्य प्रभावित नहीं हो पाता।
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इस बार की मांग और प्राप्ति इस प्रकार है
मद प्रस्तावित बजट मिला इतना
वेतन 1400 करोड़ 1200 करोड़
जनरल 225 करोड़ 160 करोड़
पूंजीगत परिसम्पत्ति 425 करोड़ 253.82 करोड़
योजनाओं पर नहीं पड़ेगा असर
इस बार के बजट से पीजीआई में चल रहे प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीजीआई में मौजूदा समय में दो बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसमें न्यूरो साइंस ब्लॉक और मदर चाइल्ड केयर यूनिट शामिल हैं। इन दोनों योजनाओं के लिए सरकार पीजीआई को पूर्व में ही बजट दे चुकी है।
2018-19 में इतना मिला था बजट
पीजीआई को 2018-19 में करीब 1474.98 करोड़ रुपये मिले थे। पहले बजट में उन्हें 1207 करोड़ आवंटित हुए। बाद में पीजीआई ने सरकार से 267 करोड़ रुपये की अतिरिक्त डिमांड की। वह भी सरकार ने मंजूर कर दिए।
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2019-20 में इतना मिला था बजट
पीजीआई को 2019-20 में 1500 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 1900 करोड़ रुपये की डिमांड की गई थी। इस हिसाब से पिछले साल भी संस्थान को 400 करोड़ रुपये कम मिले थे।
कोट
बजट से हमें कोई निराशा नहीं है। इस बार पिछले साल से लगभग 200 करोड़ रुपये ज्यादा बजट मिला है। जहां तक कार्य प्रभावित होने की बात है तो जब कभी पीजीआई में बजट की कमी हुई है तो हमें सरकार ने हमेशा अतिरिक्त बजट प्रदान किया है। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई
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