इसके अलावा तीसरी मंजिल पर पीछे की ओर टीनशेड लगाकर भी कुछ केबिन बनाए थे। पूरे मकान में 30 कमरे बने हुए थे और 34 लड़कियां रहती थीं। प्रत्येक लड़की से 10 हजार रुपए लेते थे। इसमें दो समय का खाना भी शामिल रहता था। वहीं गर्मी के दिनों में एसी का बिल अलग से लेते थे।
हर माह लाखों रुपये किराया आने के बावजूद पीजी संचालक ने सुरक्षा मानकों को दरकिनार रखा था। हादसे केे वक्त निकलने के लिए संकरी सीढ़ियां ही एकमात्र विकल्प था लेकिन वहां आग भड़की हुई थी। इस हादसे में लड़कियां घबरा गईं और खुद को बचाने में नाकाम रहीं। दो लड़कियों ने सूझबूझ का सहारा लिया और पीछे के रास्ते से बाहर निकल आईं।
आसापास के लोगों का कहना था कि एस्टेट ऑफिस के अधिकारी और पुलिस की मिलीभगत का ही नतीजा है कि अवैध पीजी संचालित हो रहे हैं। अन्यथा किसी भी हाल में शहर में गैरकानूनी काम नहीं हो सकता। फिलहाल नीतेश बंसल पुलिस गिरफ्त में हैं। वहीं मकान मालिक गौरव अनेजा और नीतेश पोपली फरार हैं।