अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव
वहीं जम्मू-कश्मीर से आए लोक कलाकारों ने डोगरी नृत्य के माध्यम से शादी-ब्याह में किए जाने वाले हल्के-फल्के हास-परिहास का चित्रण किया। मणिपुर के कलाकारों ने लाइहरोबा, त्रिपुरा के कलाकारों ने होजागिरी, झारखंड के कलाकारों ने छाउ नृत्य से समां बांध दिया।
पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने नटवाहू नृत्य, महाराष्ट्र के कलाकारों ने लावणी नृत्य, राजस्थान से आए लोक कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत किया। उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने मयूर नृत्य पेश कर कार्यक्रम को कृष्णमय कर दिया। इस नृत्य में बरसाना की गलियों में कृष्ण का घूमना, मोरकुटी में भगवान कृष्ण का मोर बनकर पहुंचना जैसी लीलाओं का वर्णन किया गया।