उपभोक्ता के हितों की सुरक्षा में चंडीगढ़ का उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और फोरम देश में सबसे आगे हैं। यहां छह महीने में ही केसों का निपटारा कर दिया जाता है। चंडीगढ़ के फोरम का निपटान दर 97 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसके बाद केरल का नंबर आता है। चंडीगढ़ में रोजाना औसतन 18 केस दाखिल होते हैं।
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सेक्टर-19 स्थित राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में कई तरह की शिकायतें आ रही हैं। इनमें प्रॉपर्टी, बीमा और बैंकिंग से जुड़े मामले अधिक हैं। इन दिनों ऑनलाइन शॉपिंग व साइबर धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भी बढ़ गई है। चंडीगढ़ में साल 1989 में उपभोक्ता आयोग के फोरम का गठन हुआ था।
अब तक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में कुल 24,268 मामले आए हैं, जिनमें से 23,214 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। केसों का निपटान दर 95.66 प्रतिशत है। वहीं, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-एक और दो को मिलाकर कुल 63,108 मामले आए हैं, जिनमें से 61,413 केसों का निपटारा भी हो चुका है।
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यहां का निपटान दर 97 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है। वकील और उपभोक्ता मामलों के जानकार पंकज चांदगोठिया ने बताया कि चंडीगढ़ के स्टेट कमीशन व फोरम का डिस्पोजल रेट देश में सबसे अधिक है। शिकायतकर्ता को तारीख पर तारीख नहीं मिलती। औसतन 6 महीनों के अंदर केस का निपटारा भी कर दिया जाता है।
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के केस (30 सितंबर 2019 तक)
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
प्लॉट नंबर-5बी, सेक्टर-19बी, चंडीगढ़
ऐसे करें शिकायत
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1800-11-4000 या 0172-2700183 पर कॉल कर सकते हैं।
- वेबसाइट पर लॉगइन करके भी कंप्लेंट रजिस्टर कॉलम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- जिले के उपभोक्ता फोरम में जाकर लिखित शिकायत कर सकते हैं।
- सेक्टर-19 स्थित फोरम में एक सेंट्रलाइज्ड शिकायत केंद्र बनाया गया है, जहां पर केस फाइल करने संबंधी कोई भी जाकर हर तरह की जानकारी ले सकता है।
ऐसे दें लिखित शिकायत
एक सादे कागज पर निर्धारित वाद शुल्क के साथ खुद या वकील के जरिए फोरम में तीन कॉपी के सेट में शिकायत दाखिल कर सकते हैं। शिकायतकर्ता व विपक्षी का नाम, पता, शिकायत का कारण कब पैदा हुआ और मांगी गई क्षतिपूर्ति का विवरण भी प्रमाण के साथ देना जरूरी है। फोरम के पक्ष में पोस्टल ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये वाद शुल्क जमा होगा। दुकानदार, मैन्यूफैक्चर्स, डीलर या फिर सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
शिकायत के साथ कैश मेमो, रसीद की कॉपी, बिल, गारंटी या वारंटी कार्ड, कंपनी या दुकान पर की गई शिकायत का सबूत देना होगा।
ऐसे तय करें अपना फोरम
20 लाख रुपये तक के मामले की शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम। 20 लाख से 1 करोड़ रुपये के मामले में राज्य उपभोक्ता फोरम और 1 करोड़ रुपये से अधिक के प्रकरण में राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम, नई दिल्ली में शिकायत की जाएगी।
आर्थिक रूप से तय होगी फीस
- 5 लाख रुपये तक कोई फीस नहीं
- 5 लाख से 10 लाख तक के लिए 200 रुपये
- 10 लाख से 20 लाख रुपये तक के लिए 400 रुपये
(स्टेट कमीशन)
- 20 लाख से 50 लाख तक के लिए 2000 रुपये
- 50 लाख से 1 करोड़ तक के लिए 4000 रुपये
(नेशनल कमीशन)
- 1 करोड़ से अधिक रुपये के लिए 5000 रुपये