देश के पहले 20 स्मार्ट सिटी में चंडीगढ़ को जगह न मिलने का मामला शुक्रवार को सदन की बैठक में भी गरमाएगा। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी की है। कांग्रेस का कहना है कि इसके लिए सिर्फ और सिर्फ भाजपा सरकार जिम्मेवार है।
जबकि मेयर अरुण सूद भी बचाव करते हुए कहा कि वह प्रशासन से बात करेंगे और प्रशासन के अधिकारी ही बता सकते है कि स्मार्ट सिटी की घोषणा में चंडीगढ़ का नाम शामिल क्यों नहीं हुआ। सूद का कहना है कि उनकी प्राथमिकता स्वच्छ भारत मिशन और लोगों की सुविधाएं बढ़ाना है। यह मेयर अरुण सूद के नेतृत्व में पहली बैठक है।
प्रधानमंत्री और सांसद की नाकामी: छाबड़ा
कांग्रेस अध्यक्ष एवं पार्षद प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार ने शहर की जनता के साथ यह सबसे बड़ा धोखा किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्थानीय सांसद किरण खेर की यह सबसेे बड़ी नाकामी है जो कि शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में शामिल नहीं करा सके।
भाजपा सरकार ने शहर की जनता को निराश कर दिया है। स्थानीय सांसद शहर के लोगों के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रही हैं। छाबड़ा ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर लोगों पर जो टैक्स बढाया गया है क्या भाजपा की सरकार उसे वापस लेगी।
ठगा महसूस कर रहे शहरवासी: चावला
पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है कि भोपाल और लुधियाना जैसे शहर पहली 20 स्मार्ट सिटी में आ गए लेकिन चंडीगढ़ नहीं आ पाया। आज शहर के लोग उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने भाजपा की सरकार को चुना।
शहरवासी अपने आपको ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं। जबसे भाजपा की सरकार बनी है तब से चंडीगढ़ के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। पहले टैक्स बढ़ाए गए और फिर बजट में लगातार कटौती की गई और उसके बाद स्मार्ट सिटी का दर्जा हासिल नहीं हो सका है।
वित्त एवं अनुबंध कमेटी का आज होगा चुनाव
वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्यों के लिए चुनाव शुक्रवार को होगा। 5 सदस्यों के लिए 7 उम्मीदवार मैदान में है। कांग्रेस की ओर से सुभाष चावला और गुरबख्श रावत मैदान में है जबकि मनोनीत में से शगुफ्ता प्रवीण और अरुणा गोयल चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा की ओर से सतीश कैंथ, सतप्रकाश अग्रवाल और आशा जसवाल चुनाव लड़ रही है। सांसद को मिलाकर कुल 35 मतदाता हैं।