कोरोना के केस जिस तरह से बढ़ रहे हैं, उससे हर कोई डर रहा है। पूरे विश्व में रोजाना हजारों की संख्या में लोग मर रहे हैं। ऐसे में डर लगना लाजिमी है लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो कोरोना के खतरे के बीच मरीजों की सेवा में दिनरात जुटे हुए हैं। पूरा देश इन्हें कोरोना वॉरियर्स के नाम से जानता है। ऐसे ही एक शख्स पीजीआई के ओटी टेक्नीशियन रामसेवक हैं, जिनकी ड्यूटी आईसीयू में है। कोरोना काल में यह दूसरी बार है जब उन्हें कोरोना के गंभीर मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि उनका काम गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर व एनेस्थीसिया के डॉक्टरों को सहयोग देना है।
रामसेवक ने बताया कि जब कोरोना की शुरुआत हुई थी तो उनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में लगाई गई। पहली बार थोड़ा डर लगा था। उससे कहीं ज्यादा मां और पत्नी चिंतित थीं लेकिन पिता ने हौसला बढ़ाया। उनका कहना था कि यदि अस्पताल के वर्कर डर जाएंगे तो मरीजों का इलाज कैसे होगा। उनकी बात सुनकर हौसला बढ़ा और ड्यूटी ज्वाइन कर ली।
पीजीआई की ओर से अच्छी ट्रेनिंग मिली थी। हर काम के अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल बनाए गए थे। डॉक्टरों और स्टाफ की ओर से बहुत सहयोग मिला, जब दूसरी बार कोविड वार्ड में ड्यूटी लगी तो न तो डर लगा और न ही कोई खतरा महसूस हुआ। दोनों ही ड्यूटी में पत्नी निकिता का बहुत सहयोग मिला।
रामसेवक ने बताया कि पीजीआई के कोविड वार्ड में एडमिट मरीजों का बहुत ही ध्यान रखा जा रहा है। कुछ मरीज बुरा व्यवहार करते हैं लेकिन उनकी स्थिति को समझा जा सकता है। वार्ड के स्टाफ व अन्य लोग इसका जवाब नहीं देते हैं क्योंकि पता होता है कि जो बीमार है, उसमें चिड़चिड़ापन रहेगा। इसलिए स्टाफ शांतिपूर्वक काम करते रहते हैं। जिन लोगों की कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगी है, उनके लिए पीजीआई की ओर से अच्छे से इंतजाम किए गए हैं।