कभी देश की रक्षा के लिए कारगिल युद्ध में गोलियां खाने वाला फौजी नशे की जरूरत पूरी करने के लिए तस्कर बन बैठा। जीरकपुर पुलिस ने साथी समेत उसे गिरफ्तार कर लिया। उनसे 500 ग्राम अफीम व नशे की 1920 गोलियां बरामद हुईं। दोनों करीब तीन साल से तस्करी कर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपी जसवीर सिंह उर्फ फौजी (50) गांव बसौली, लालड़ू का रहने वाला है जबकि उसका साथी अरुण कुमार उर्फ अनु मॉडर्न एन्क्लेव बलटाना का निवासी है। जसवीर सिंह इन दिनों सिल्वर सिटी हाईट्स जीरकपुर के फ्लैट नंबर-1365/3 में किराए पर रह रहा था। दोनों आरोपियों के खिलाफ जीरकपुर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बकौल पुलिस, दोनों आरोपी यूपी, हरियाणा, राजस्थान व पंजाब से अफीम व नशीली गोलियां खरीदकर ट्राइसिटी में ग्राहक की मांग के अनुसार मुहैया कराते थे। मुख्य आरोपी अरुण कुमार पर पहले भी हेरोइन के दो मामले एसटीएफ थाना मोहाली में दर्ज हैं। अरुण व पूर्व फौजी जसवीर सिंह दोनों नशा करने के आदी थे।
दोनों अपने पक्के ग्राहकों को नशा सप्लाई करते थे। ग्राहकों से व्हाट्एसएप कॉल और कोड वर्ड के जरिए सौदा करते थे। सीआईए स्टाफ को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी जीरकपुर क्षेत्र में नशा सप्लाई करने आ रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
कारगिल का फौजी पैसों की कमी के चलते बना अपराधी
जसवीर सिंह से पूछताछ में यह बात सामने आई कि वह पहले सेना में था। कारगिल यद्ध के समय उसे गोलियां लगीं, जिसके बाद उसे यूनिट में भेज दिया गया। वर्ष 2006 में वह सेवानिवृत्त हो गया। तीन साल से वह बीएसएनएल चंडीगढ़ में नौकरी कर रहा था। यहीं उसकी मुलाकात अरुण से हुई थी। जसवीर सिहं करीब 15 साल से नशा करने का आदी था। उसे पैसों की किल्लत रहने लगी। नशे की जरूरत को पूरी करने के लिए वह तस्कर बन गया। वह अपनी कंपनी में भी मुलाजिमों को अफीम और नशे की गोलियां सप्लाई करता था।