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'नामित सांसदों को वोट का अधिकार नहीं तो नामित पार्षदों को कैसे?'

Fri, 24 Mar 2017 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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नगर निगम के चुनाव में नामित पार्षदों के मताधिकार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी गई है। मेयर पद के चुनाव में इन पार्षदों को किंग मेकर माना जाता है। ऐसे में याचिका में इन नामितों के वोटों को अवैध घोषित करने की अपील की गई है। वीरवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, चंडीगढ़ यूटी प्रशासन, एमसी और शहर के नौ नामित पार्षदों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। 
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याचिका में दलील दी गई है कि राज्यसभा के नामित सांसदों को वोटिंग का अधिकार नहीं है, तो नामित पार्षदों को यह अधिकार भला कैसे दिया जा सकता है। यह मताधिकार सीधे तौर पर चंडीगढ़ के लोगों के लोकतांत्रिक हक, उनकी भावनाओं और नियमों के खिलाफ है। अपनी जनहित याचिका में एडवोकट एचसी अरोड़ा ने कहा है कि निगम के मेयर पद के चुनाव में नॉमिनेटेड पार्षदों को मताधिकार देना संविधान के अनुच्छेद-243 आर का उल्लंघन है। इस प्रावधान के तहत नामित पार्षदों को मताधिकार नहीं दिया गया है।
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इन नामित पार्षदों को हुआ नोटिस

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि नामित पार्षद लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुने जाते हैं। ऐसे में उन्हें मेयर पद के चुनाव और उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मताधिकार का अधिकार नहीं दिया जा सकता। फिर भी चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में नामित पार्षदों को मेयर के चुनाव में मत का अधिकार दिया गया है। याची ने कहा कि चंडीगढ़ में कुल 26पार्षद हैं, जो चुन कर आते हैं। जबकि शेष 9 पार्षद नामित होते हैं। इन नामित पार्षदों के वोटों के चलते मेयर का चुनाव बुरी तरह से प्रभावित होता है।

इन नामित पार्षदों को हुआ नोटिस
चरंजीव सिंह, अजय दत्ता, सचिन कुमार, हाजी मोहम्मद, खुर्शीद अली, ज्योत्स्ना विज, शिपरा बंसल, सत प्रकाश अग्रवाल, कमल शर्मा व मेजर जनरल एमएस कंदल
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