Municipal Corporation office Chandigarh
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ऐसा अजब गजब चंडीगढ़ नगर निगम ही कर सकता है। केंद्रीय बजट में नगर निगम के लिए 419 करोड़ रुपये अलॉट किया जा चुका है। इसके बावजूद नगर निगम 16 फरवरी को बजट पास करने के लिए विशेष बैठक करने जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय बजट से पहले ही नगर निगम अपना बजट पास करता था। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ऐसे बजट को पास करने का कोई औचित्य नहीं है।
प्रशासन ने नगर निगम को जो ग्रांट दी है उसमें निगम कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर सकता। लेकिन इसके बावजूद ड्राफ्ट बजट में दो अंडरपास का निर्माण करने संबंधी प्रोजेक्ट शािमल किए गए हैं। नए स्कूल और सामुदायिक केंद्र के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है। जबकि हकीकत यह है कि इतना बजट नगर निगम के पास नहीं है। लेकिन दिखावे के लिए नगर निगम 16 फरवरी को होने वाली बैठक में इसे पास करेगा।
इसके साथ ही नगर निगम की ओर से जो ड्राफ्ट बजट तय किया गया है वह एक हजार करोड़ से ज्यादा का है और सदन में एक हजार से ज्यादा करोड़ का ही बजट पास किया जाएगा। यह सिर्फ एक दिखावा है। पिछले साल भी 1072 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया था लेकिन खर्चा 400 करोड़ का भी नहीं हो पाया। ऐसे में यह सिर्फ दिखावे के लिए ही आकड़ा ज्यादा करने के लिए बजट पास किया जाता है। जबकि नगर निगम की एक साल की कमाई 100 करोड़ भी मुश्किल से है।
बाकी राशि कहां से आएगी कोई जबाव नहीं
नगर निगम, चंडीगढ़
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बाकी राशि कहां से आएगी कोई जबाव नहीं
प्रशासन ने 419 करोड़ रुपये का जो बजट पास किया है उसमे 100 करोड़ सिर्फ स्मार्ट सिटी क लिए है। यह सिर्फ दिखाने के लिए नगर निगम के कोटे में प्रशासन ने डाले हैं। जबकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन ने अलग से कंपनी गठित कर दी है। ऐसे में नगर निगम को सिर्फ 319 करोड़ रुपये का बजट ही मिला है। जिसमें 200 करोड़ रुपये अकेले नगर निगम को एक साल के लिए सरकारी कर्मचारी और पानी के लिए हो रहे 60 करोड़ के घाटे को पूरा करने के लिए ही चाहिए।
इसके साथ ही शहर की साफ सफाई के लिए नगर निगम को 60 करोड़ रुपये चाहिए। कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज के लिए नगर निगम को इस साल 100 करोड़ की जरूरत है। लेकिन प्रशासन ने नगर निगम को इसके लिए 50 करोड़ की राशि ही दी है। ऐसे में बाकी राशि का बोझ भी ग्रांट पर पड़ेगा।
प्रोजेक्ट पास नहीं किया तो क्लेम खत्म हो जाएगा: सूद
पूर्व मेयर एवं वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य अरुण सूद ने कहा कि निगम की ग्रांट बेशक तय हो चुकी है, लेकिन हर संस्थान के लिए अपना बजट पास करना जरूरी होता है। ड्राफ्ट बजट को पास होने से पहले लीक नहीं किया जा सकता इसलिए ड्राफ्ट बजट में राशि का आंकड़ा नहीं डाला गया। प्रशासन ने जो ग्रांट नगर निगम को दी है, बेशक वह प्रस्तावित बजट के मुकाबले में आधी है लेकिन इसके बाद भी छह माह बाद केंद्र सरकार को रिवाइज एस्टीमेट भेजा जाता है उस समय भी राशि मिलती है। नगर निगम उस समय भी केंद्र सरकार से ग्रांट लेगी। अगर अभी प्रोजेक्ट्स को पास नहीं करेगा तो नगर निगम का क्लेम ही खत्म हो जाएगा।
7 फरवरी तक मांगे गए थे सुझाव
पार्षदों के साथ मेयर
7 फरवरी तक मांगे गए थे सुझाव
मेयर आशा जसवाल का कहना है कि पार्षदों, फासवेक और व्यापार मंडल से 7 फरवरी तक सुझाव मांगे गए थे। जो जो भी सुझाव आए हैं उन्हें भी ड्राफ्ट बजट में शामिल किया जाएगा। 16 को सदन में चर्चा में लाने से पहले 13 को वित्त एवं अनुबंध कमेटी में बजट को पास किया जाएगा।
16 फरवरी को विशेष बजट की बैठक तो हो रही है, लेकिन यह समझ नहीं आ रहा कि अब बजट पास करने का क्या फायदा? हर बार केंद्रीय बजट पास होने से पहले निगम बजट पास करता था ताकि वह अपना बजट पास करके प्रशासन के पास भेज सके। ऐसे में जो बजट पास होगा वह सिर्फ एक दिखावा होगा। वहीं काम बजट में शामिल किए जाएं जो कि नगर निगम पूरा करवा सकता है। जब राशि ही नहीं है तो करोड़ों रुपये के नए बजट पास करने का क्या फायदा। कांग्रेस कार्यकाल में एक बार केंद्रीय बजट से दो दिन पहले नगर निगम ने बजट पास किया था तो भाजपा ने काफी शोर मचाया था। लेकिन इस बाद केंद्र के बजट के बाद नगर निगम का बजट पास किया जाएगा।
प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष, चंडीगढ़