चंडीगढ़ नगर निगम ने एक बार फिर पेंशन फंड से बड़ी रकम निकाली है। पहले बिजली बिल भरने के लिए 6 करोड़ रुपये निकाले गए थे और अब कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए 50 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। ब्याज दरों को देखते हुए निगम ने लोन लेने से परहेज किया है और अप्रैल में ग्रांट मिलने के बाद पेंशन फंड में यह राशि वापस जमा करने की योजना बनाई है।
मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि कर्मचारियों को सैलरी देना बहुत जरूरी है। निगम ने पहले लोन लेने पर विचार किया था लेकिन उसमें ब्याज देना पड़ रहा था। जैसे घर में बजट कम होने पर दूसरे फंड से पैसा निकाल कर काम चलाया जाता है, वैसे ही पेंशन फंड से 50 करोड़ रुपये निकाल कर कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। अप्रैल के पहले हफ्ते में जैसे ही प्रशासन से ग्रांट-इन-एड आएगी तो लोन लेने पर जो ब्याज लगता था, उसके साथ कर्मचारियों के पेंशन फंड में यह 50 करोड़ रुपये जमा कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शनिवार को कर्मचारियों की सैलरी आ जाएगी।
लगातार पेंशन फंड से पैसा निकालने की वजह से नगर निगम के पुराने कर्मचारी भड़के हुए हैं। उनका कहना है कि निगम कर्मचारियों के पैसे ही कर्मचारियों को दे रहा है। निगम की आर्थिक स्थिति लंबे समय तक खराब रहने वाली है। पेंशन फंड से पैसे निकालकर कर्मचारियों को देना बहुत गलत है। एक बार यह प्रथा शुरू हो गई तो आने वाले समय में हर बार नगर निगम द्वारा ऐसे ही किया जाएगा। पेंशन फंड किसी कर्मचारी के बुढ़ापे का सहारा होता है। ऐसे में अगर पेंशन फंड भी खत्म हो गया तो रिटायर होने वाले कर्मचारी कहीं के नहीं रहेंगे।