मेयर आशा जसवाल को मनाने के लिए उनके सेक्टर-21 स्थित आवास पर संगठन मंत्री दिनेश कुमार, भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और भाजपा के मेयर पद के उम्मीदवार देवेश मोदगिल तीन घंटे तक लगे रहे, लेकिन आशा जसवाल का सीधा जवाब अगर पार्टी को बचाना है तो देवेश मोदगिल नामांकन वापस ले लें, मैं नहीं लूंगी। देवेश का राजनीतिक कैरियर अभी काफी लंबा है, आगे मेयर बनने का मौका मिल जाएगा। इस दौरान संजय टंडन ने काफी मान मनौव्वल किया, लेकिन आशा जसवाल नहीं मानीं।
टंडन ने यह भी कहा कि देवेश मोदगिल तो भाई के समान है। आखिर सभी को मिलकर नगर निगम चलाना है। संगठन मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि मोदगिल को माफ कर नामांकन वापस ले लो। इसके जवाब में आशा जसवाल ने कहा कि पार्टी प्रभारी प्रभात झा ने उनकी नहीं सुनी, जबकि मोदगिल के खिलाफ अधिकतर पार्षद थे। इसी बीच टंडन बोल पड़े कि आप की (आशा) अलग से प्रभात झा से बैठक करवा देंगे। चौतरफा घिरे टंडन ने कहा कि हम सबने मिलकर पार्टी को मजबूत किया है, अब बिखरते-टूटते नहीं देख सकता।
टंडन ने आशा जसवाल से कहा कि हाईकमान का काफी दबाव है। बागी सभी पार्षद उनके ही हैं। नामांकन वापस न लेने पर पार्टी की छवि धूमिल होगी। तिनका-तिनका जोड़कर पार्टी को खड़ा किया और अब बगावत से कमजोर नहीं किया जा सकता। तीन घंटे की बैठक बेनतीजा रही। हांलाकि, अभी यह तय हुआ है कि एक बार फिर से आशा जसवाल के साथ बैठक की जाएगी।
कसम तक दिलाई जा रही
Mayor Elections 2018
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों का कहना है कि रविवार को पार्टी प्रभारी प्रभात झा चंडीगढ़ आएंगे और आशा जसवाल को मनाया जाएगा। उधर, संजय टंडन ने संगठन मंत्री और मोदगिल को आश्वासन दिया है कि आशा जसवाल का नामांकन चुनाव से पहले वापस दिलवा दिया जाएगा। आशा जसवाल टंडन गुट की हैं।
पार्टी के फैसले के खिलाफ नामांकन से टंडन की छवि धूमिल हो रही है। हाईकमान के सामने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए टंडन भी जसवाल को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। शुक्रवार को बैठक में भाजपा पार्षद राजेश कालिया, कंवरजीत राणा, फरमिला देवी और चंद्रवती शुक्ला ने भी हिस्सा लिया।
कसम तक दिलाई जा रही
सूत्रों के मुताबिक भाजपा से बागी पार्षदों को कसमें दिलवाई जा रही हैं कि चुनाव होने की स्थिति में वह मेयर आशा जसवाल को ही वोट दिलवाएंगे। ऐेसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान के नेता बागी पार्षदों पर दबाव बना सकें तो कोई भी पलटे न। यह भी रणनीति बनाई गई है कि पार्टी के दबाव के कारण अगर यह भी कहना पड़े कि वह आशा जसवाल के साथ नहीं हैं और पार्टी के साथ है तो यह भी सीनियर नेताओं को कह दिया जाए, लेकिन वह सभी एकजुट ही रहेंगे।
राजेश गुप्ता का यूटर्न
Mayor Elections 2018
वर्तमान मेयर आशा जसवाल और उनके समर्थित बागी पार्षदों के गुट को बड़ा झटका लगा है। वर्तमान सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता मेयर को छोड़ पार्टी के फैसले के साथ आ गए हैं। मंगलवार को मेयर आशा जसवाल के साथ जिन 11 पार्षदों ने मोदगिल को उम्मीदवार बनाने के खिलाफ बगावत की थी, उसमें राजेश गुप्ता भी शामिल थे। राजेश गुप्ता ने आशा जसवाल के नामांकन के एक सेट को प्रस्तावित भी किया था। गुप्ता खुद भी मेयर पद के दावेदार थे। गुप्ता भाजपा में सबसे सीनियर पार्षद हैं। वह अकेले भाजपा में ऐेसे पार्षद हैं, जो तीन बार चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचे है।
राजेश गुप्ता का कहना है कि पार्टी सुप्रीम है। वह पार्टी के निर्णय के साथ हैं। गुप्ता ने माना कि जब उन्हें उम्मीदवार न बनाकर मोदगिल को अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया तो उनके मन में गुस्सा और गिला शिकवा था, इसलिए आशा जसवाल के साथ खड़े थे, लेकिन अब वह पार्टी के निर्णय के साथ हैं। उनकी पहचान पार्टी के साथ है। गुप्ता का कहना है कि अच्छा होता कि चंडीगढ़ के नेता ही फैसला कर हाईकमान को भेजते। पार्टी निर्णय करती तो इतना बवाल नहीं होता। पार्टी का सिपाही हूं और पार्टी का ही आदेश मानूंगा।
पहले 14 थे खिलाफ, अब रह गए 10
शुरुआत में 14 पार्षद इकट्ठे होकर पार्टी प्रभारी प्रभात झा से यूटी गेस्ट हाउस में मिले थे। उस समय पूर्व मेयर राज बाला मलिक, महेश इंद्र सिद्धू, गुरप्रीत ढिल्लो टंडन गुट के साथ थे, लेकिन वह पार्टी के निर्णय के समर्थन में थे। जब आशा जसवाल ने नामांकन भरने का निर्णय लिया तो उसी समय राज बाला मलिक, ढिल्लो और सिद्धू उन्हें छोड़कर मोदगिल के साथ आ गए थे। ऐसे में अब आशा जसवाल के साथ 10 पार्षद रह गए हैं।