‘दुराचार के मामलों में चंडीगढ़ भी अब दिल्ली से पीछे नहीं है। चंडीगढ़ पुलिस को उत्कृष्ट कार्य को प्रोत्साहित करने, पुलिस पेट्रोलिंग और प्रबंधन के अलावा बिना जांच के चल रहे ऑटो पर भी नजर रखनी चाहिए। अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी नजर रखनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं होने से रोकी जा सकें। यह केस सबसे परफेक्ट उदाहरण है, यह बताने के लिए कि ‘शांतिपूर्ण शहर असुरक्षित बन गया है।’ विशेष अदालत की जज पूनम आर जोशी ने यह टिप्पणी 21 वर्षीय युवती से सामूहिक दुराचार के मामले में सुनाए अंतिम फैसले में की।
विशेष अदालत की जज ने फैसले में कहा है कि महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध की तुलना में दुराचार की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि 2016 में महिलाओं के प्रति अपराध में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि दुराचार के मामलों में 12 प्रतिशत की वृद्धि। शुरुआत में यह सोचा जाता था कि राजधानी दिल्ली में हर साल दुराचार के मामलों की संख्या पिछले 5 वर्ष में तीन गुना हो गई है, लेकिन अब चंडीगढ़ दिल्ली से पीछे नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 2015-16 में हर घंटे में रेप की चार घटनाएं हुई हैं।
‘अभागी हैं वो माताएं जिन्होंने ऐसे जानवरों को जन्म दिया’
अभागी हैं वो माताएं जिन्होंने ऐसे जानवरों को जन्म दिया और उन्हें इस उम्मीद से छाती से लगाए रहीं कि एक दिन वह उनके भविष्य को सुरक्षित करेंगे। हालांकि वह नहीं जानती थी कि, जिन्हें वह जन्म दे रही हैं वह न केवल उनके परिवार बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक हैं। अदालत ने यह टिप्पणी देते हुए तीनों दोषियों की बूढ़े माता-पिता की देखभाल के लिए सजा के प्रति नरमी की अपील को खारिज कर दिया।
शांत शहर बना असुरक्षित
जजमेंट में कहा गया है कि, यह केस सबसे परफेक्ट उदाहरण है, यह बताने के लिए कि ‘शांतिपूर्ण शहर असुरक्षित बन गया है’। एक युवती जो अपनी आजीविका के लिए घर से नौकरी के लिए बाहर निकली है और ऐसे हादसे का शिकार हो गई है। लेकिन वह व्यक्ति जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट चला रहा है उस पर सभी लोगों का विश्वास होता है। इस घटना ने चंडीगढ़ में रहने वाली हर महिला को अनगिनत बार सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि शाम ढलने के बाद उसे घर से बाहर निकलना चाहिए या नहीं। भले ही उसे बहुत जरूरी काम क्यों न हो। इस घटना ने महिला वर्ग ही नहीं बल्कि पूरे शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पुलिस को आदेश, प्रोत्साहित करने के साथ एक्शन भी लें
फैसले में अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को भी आदेश दिया है कि यह गंभीर समय है। पुलिस न केवल ऑटो बल्कि अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट की भी जांच करें। पुलिस को जरूरत है कि वह समाज और पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने की बजाय ग्राउंड लेवल पर एक्शन भी ले। दो राज्यों की राजधानी जो दो नाव एक पुलिस गश्त और दूसरा बेहतरीन प्रबंधन पर टिकी है। लेकिन, इस घटना ने न केवल शहर के लोगों बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। शहर में बिना जांच के ऑटो चल रहे हैं और इन पर पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है। यह हाई टाइम है जब पुलिस इस मामले को देखते हुए शहर में चलने वाले सभी ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहनों की जांच कर सकती है। ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।