रेमडेसिविर की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी कर एक मई को स्वास्थ्य निदेशक के निर्देश पर कमेटी बनाई गई थी। इसके बाद 3 मई से सरकारी व निजी अस्पतालों में कमेटी ने इंजेक्शन की आपूर्ति शुरू की गई। 3 से 9 मई के बीच स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने पीजीआई को 1000, शहर के निजी अस्पतालों को 407 व अन्य सरकारी अस्पतालों को 1191 इंजेक्शन की आपूर्ति की है। वहीं, 8 मई को किसी भी सरकारी व निजी अस्पताल ने कमेटी से इंजेक्शन की मांग नहीं की थी।
अस्पताल और विभाग दोनों के पास रिकॉर्ड
डॉ. कंग ने बताया कि किस अस्पताल को इंजेक्शन के कितने डोज दिए जाने हैं, इसका निर्णय स्वास्थ्य विभाग ले रहा है। वहीं, इंजेक्शन लेने वाले सरकारी और निजी अस्पताल या नर्सिंग होम ने किस मरीज को कब और कितनी डोज दी, इसका पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है। इसके अलावा अस्पताल संचालक मरीज का नाम, आधार नंबर या आईडी प्रूफ, मरीज को अस्पताल में इलाज के लिए कब भर्ती किया गया और इंजेक्शन के लिए किस डॉक्टर ने प्रिसक्रिप्शन लिखा है, उसका नाम रिकॉर्ड में रख रहे हैं।
इमरजेंसी के लिए सिर्फ 6 डोज
डॉ. कंग ने बताया कि नए दिशा-निर्देश के अनुसार निजी अस्पतालों को इमरजेंसी के लिए सिर्फ 6 रेमडेसिविर इंजेक्शन का डोज रखने की अनुमति दी गई है। अगर अस्पताल उस डोज का इस्तेमाल इमरजेंसी में करता है तो उसका रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग को देना होगा।