चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण (पब्लिक अथॉरिटी) घोषित करने वाले एकलपीठ के फैसले के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने क्लब की अपील पर नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली और अंतिम सुनवाई अब 14 अक्तूबर को होगी। तब तक एकलपीठ का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
क्लब की ओर से अदालत में कहा गया कि 29 मई को एकलपीठ ने उसकी याचिका खारिज करते हुए उसे आरटीआई अधिनियम के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना था। इस फैसले को चुनौती देते हुए क्लब ने दलील दी कि एकलपीठ ने दो आधारों पर यह निष्कर्ष निकाला, लेकिन दोनों ही तथ्य वर्तमान स्थिति से मेल नहीं खाते।
बाजार दर के अनुसार किराया देने का दावा
क्लब ने अदालत को बताया कि अब वह चंडीगढ़ प्रशासन को आकलित बाजार मूल्य के अनुरूप किराया अदा कर रहा है। इसलिए यह कहना गलत है कि उसे सरकारी जमीन रियायती दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। क्लब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल किसी प्रकार की रियायत या सब्सिडी मिलने भर से किसी संस्था को आरटीआई कानून के तहत ''''लोक प्राधिकरण'''' नहीं माना जा सकता।
सरकार के तीन सदस्य होने से नियंत्रण साबित नहीं होता
क्लब ने यह भी तर्क दिया कि 15 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में चंडीगढ़ प्रशासन के केवल तीन नामित सदस्य हैं। इनकी मौजूदगी से यह नहीं माना जा सकता कि प्रशासन का क्लब पर पर्याप्त नियंत्रण है। इन सदस्यों की भूमिका केवल यह सुनिश्चित करने तक सीमित है कि क्लब लीज की शर्तों और प्रशासन के नियमों का पालन करे। यदि कोई उल्लंघन होता है तो वे केवल यूटी प्रशासन को इसकी जानकारी देते हैं। ऐसे में इसे प्रशासन का प्रत्यक्ष या प्रभावी नियंत्रण नहीं कहा जा सकता। वहीं, मामले में शामिल दूसरे पक्ष ने एकलपीठ के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारी जमीन, प्रशासन की भूमिका और बोर्ड में सरकारी प्रतिनिधित्व को देखते हुए क्लब को आरटीआई अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण माना जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 14 अक्तूबर की तारीख तय कर दी। अब अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चंडीगढ़ गोल्फ क्लब आरटीआई अधिनियम के दायरे में आएगा या नहीं।