पढ़ाई डिप्लोमा इलेक्ट्रॅनिक्स का और काम साउंड रिकार्डिंग का। शुरू में दो हजार की नौकरी की और अब अपना स्टूडियो बना दिया। खास बात यह है कि इनका साल में चालीस लाख का टर्न ओवर है। ये हैं स्वर सुधा रिकार्डिंग स्टूडियो के मालिक संजय चौबे। उन्होंने एनडीए भी क्वालिफाई किया। लेकिन वे एनडीए ज्वाइन नहीं किया।
उत्तर प्रदेश के जिला बलिया निवासी संजय चौबे वर्ष 1994 में चंडीगढ़ आए। उनके पिता आर्मी में थे। पिता ने उनके लिए कई जगह नौकरी की तलाश करवाई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
एक दिन अखबार में रिकार्डिंग स्टूडियो में नौकरी का विज्ञापन छपा था। वहां पर गए और उन्हें तुरंत नौकरी मिल गई। दो हजार रुपये वेतन पर। उस स्टूडियो में उनका काम इलेक्ट्रानिक से संबंधित था। वहां पर साउंड रिकार्डिस्ट रजनीश शर्मा ने उनसे रिकार्डिंग का काम सीखने को कहा।
उन्होंने इलेक्टॉनिक का काम छोड़ साउंड रिकार्डिंग से नाता जोड़ लिया। इस फील्ड की एक एक बारीकियों को सीखा। उन्हें मौका मिलने पर पंजाब के जाने माने गायकों की रिकार्डिंग की। पंजाब के हर म्यूजिक डायरेक्टर के साथ काम किया। पहले सरगम स्टूडियो और उसके दो साल के बाद सुर संगम में ज्वाइन किया।
उसके बाद वे अपना स्वयं का सेक्टर-22 के एससीओ नंबर 2473-74 में आडियो वीडियो फिल्म स्टूडियो स्वर सुधा रिकार्डिंग स्टूडियो के नाम से खोला। वे अपने गुरु रजनीश शर्मा को ही इसका श्रेय देते हैं। चौबे कहते हैं कि पहले स्टूडियो में नौकरी की अब अपना स्टूडियो है।
संजय चौबे का कहना है कि फिल्म डबिंग, साउंड रिकार्डिंग, डाक्यूमेंटरी और लाइट एंड साउंड का काम शुरू कर दिए हैं। उनका कई लाइट एंड साउंड का कार्यक्रम अमरीका तक भेजे हैं। रामलीला और कृष्ण लीला की लाइट एंड साउंड अमरीका में धूम मची है। उन्हें बहुत खुशी मिलती है कि उन्होंने इस लाइन में कई लड़कों को ट्रेड किया।