चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम वन्य जीव तस्करों की गिरफ्तारी के बावजूद पूरे खेल का राज खोलने में अभी तक नाकाम ही रही है। जबकि, पुलिस का दावा था कि आरोपियों का लिंक हरियाणा, यूपी और राजस्थान से है।
कारिंदों को काबू करने के बाद पुलिस सौदागरों तक नहीं पहुंच पाई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने दो वन्य जीव तस्करों को तीन सैंड बोआ यानी दो मुंहे सांपों के साथ सेक्टर-26 से गिरफ्तार किया था।
नया गांव निवासी रनवीर (26) और मनीमाजरा निवासी विजय (20) आरोपी थे। पुलिस का दावा था कि ये लोग एक सांप को 15 लाख रुपये तक में बेचते थे।
इसमें आरोपी विजय मूल रूप से सोनीपत का निवासी है और वह लंबे समय से दवा बनाने वालों को सांपों की तस्करी करता था। दवाइयां के अलावा इन सांपों को लोग घरों में सौभाग्य के लिए भी रखते हैं
यह केस के अनसुलझे सवाल?
1- चंडीगढ़ में आरोपी सांप किसको बेचने आए थे?
2- सांपों को दवा बनाने में इस्तेमाल करने वाले आरोपियों की पहचान क्यों नहीं हुई?
3- वन्यजीव तस्करी से जुड़े आरोपी क्या सिर्फ सांपों का ही व्यापार करते थे?
4- हरियाणा, पंजाब और यूपी से जुड़े लिंक पर पुलिस कुछ नही निकाल पाई?
5- क्या वन्यजीव तस्करी के इतने बड़े व्यापार को सिर्फ दो करिंदे चला रहे थे?