चंडीगढ़। अक्षय ऊर्जा दिवस पर चंडीगढ़ ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। शहर में अब तक 10,988 स्थलों पर कुल 90.7 मेगावाट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। इससे हर साल करीब 118 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होगी और 81 हजार टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकारी भवनों पर 52.825 मेगावाट क्षमता के इंस्टॉलेशन के साथ चंडीगढ़ पूरे देश के लिए अक्षय ऊर्जा का रोल मॉडल बनकर उभरा है।
चंडीगढ़ प्रशासन के पर्यावरण विभाग के अनुसार सरकारी 6,606 भवनों पर 52.825 मेगावाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। वहीं, निजी क्षेत्र में 4,364 साइट्स पर 31.838 मेगावाट क्षमता जुड़ी है। यानी करीब 58 प्रतिशत सौर ऊर्जा सरकारी भवनों से आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भवनों पर सौर पैनल लगाने की यह पहल निजी क्षेत्र और आम नागरिकों को भी प्रेरित कर रही है। इन सभी सोलर प्लांट्स से हर साल करीब 117.915 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी। यह उत्पादन शहर की कुल ऊर्जा खपत का बड़ा हिस्सा पूरा करने में सक्षम है। खास बात यह है कि यह ऊर्जा पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होगी, जिससे पर्यावरण को सीधा लाभ पहुंचेगा। लगाए गए सोलर पैनल बिजली बिलों में बड़ी राहत दे रहे हैं। नेट-मीटरिंग पॉलिसी के तहत लोग अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आर्थिक लाभ भी उठा रहे हैं।
81 हजार टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन में कमी
सौर ऊर्जा से न सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ रहा है बल्कि प्रदूषण पर भी नियंत्रण हो रहा है। अब तक की स्थापना से सालाना 81.361 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन घटने का अनुमान है। यही नहीं, अब तक की कुल उपलब्धियों में चंडीगढ़ 279.81 मिलियन यूनिट ऊर्जा पैदा कर चुका है और इस दौरान 193.06 मीट्रिक टन सीओ2 उत्सर्जन रोका गया है। चंडीगढ़ प्रशासन की यह पहल पूरे देश में मिसाल बन रही है। नीति आयोग और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय कई बार चंडीगढ़ के मॉडल की सराहना कर चुके हैं।
पवन ऊर्जा से भी रोशन होगा चंडीगढ़
पहली बार चंडीगढ़ ने पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) खरीदने की भी तैयारी कर ली है। इसके तहत क्रेस्ट ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के माध्यम से 40 मेगावाट पवन ऊर्जा खरीदने की योजना बनाई है। भारत सरकार ने सभी राज्य व यूटी को यह टारगेट दिया है कि नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने में सौर ऊर्जा के अलावा अन्य ऊर्जा को भी अपनाना है। रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (आरपीओ) वर्ष 2023 में पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी 0.81 फीसदी निर्धारित थी, जो 2030 तक बढ़ाकर 6.94 फीसदी कर दी गई है। यानी सभी राज्य व यूटी को 2030 तक 6.94 फीसदी ऊर्जा, पवन ऊर्जा से प्राप्त करनी है। इसी दिशा में पहल करते हुए चंडीगढ़ 40 मेगावाट पवन ऊर्जा खरीदेगा। इसके लिए क्रेस्ट एक प्लेटफार्म का काम करेगा और यूटी प्रशासन का पावर विभाग व सीपीडीएल इस खरीद की जिम्मेदारी को निभाएंगे।
कार्बन उत्सर्जन को मापने के लिए होगी बेसलाइन स्टडी
यूटी प्रशासन ने हाल ही में स्टेट एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज फॉर चंडीगढ़ 2.0 (एसएपीसीसीसी) को लागू किया है। इसके अंतर्गत योजना की निगरानी और असर को मापने के लिए मॉनिटरिंग, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग (एमईआर) सिस्टम तैयार किया गया है। इसके साथ एक जलवायु परिवर्तन केंद्र (सीसीसी) स्थापित करने का प्रस्ताव है जो विभागों के बीच तालमेल बनाएगा, आंकड़ों को संभालेगा और जानकारी साझा करेगा। कार्बन उत्सर्जन को मापने के लिए एक बेसलाइन स्टडी भी की जाएगी।