सोमवार को पार्षद पुणे और मुंबई के अलग-अलग स्टडी टूर पर जा रहे हैं। इन दोनों टूर में 9-9 पार्षदों का समूह जा रहा है। जबकि 18 अप्रैल को 9 पार्षदों का एक और टूर विशाखापटनम जा रहा है। भाजपा के कार्यकाल में पहली बार पार्षद स्टडी टूर पर जा रहे हैं।
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मुंबई वाले दल में 8 महिला पार्षदों के साथ सिर्फ एक पुरुष पार्षद राजेश कालिया जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्टडी टूर पर जाने का फायदा तो तब है, जब शहर को उसका कोई फायदा भी मिले। ऐसे घूमना फिरना तो ठीक नहीं है। नगर निगम 2004 से 2015 तक स्टडी टूर पर एक करोड़ 42 लाख रुपये खर्च कर चुका है। लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम अपनी आय बढ़ाने के लिए टैक्स लगाता है, जबकि स्टडी टूर पर पैसा बहाता है।
मेयर आशा जसवाल का कहना है कि इस बार सभी तीनों स्टडी टूरों का शहर को फायदा मिलेगा। रिपोर्ट को भी लागू करवाया जाएगा। गौरतलब है कि 2014 के बाद अब स्टडी टूर जा रहा है। इस विवादित टूर में 13 पार्षदों से 9-9 हजार रुपये की रिकवरी भी की गर्ई थी क्योंकि ये पार्षद अपने परिवार को साथ लेकर गए थे। इनमें मेयर का नाम भी शामिल है। इस टूर में अकाली पार्षद मलकीयत सिंह की बीमार होने के कारण मौत भी हो गई थी। वहीं इस बार इन तीनों टूर पर कोई भी परिवार के सदस्यों को साथ लेकर नहीं जा रहा है।
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अभी तक ये हुए हैं स्टडी टूर
आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
अभी तक ये हुए हैं स्टडी टूर
साल टूर का स्थल व्यय (लाखों में)
2004 चेन्नई, हैदराबाद और बंगलूरू 125400
2004 गोवा 347100
2004 बंगलूरू और मैसूर 301210
2007 मुंबई 19530
2007 सिंगापुर और बैंकाक 1510560
2009 गुजरात 586075
2010 केरल 1381600
2010 गंगटोक 1607791
2010 कोलकाता और गंगटोक 1389032
2010 केरल 1381600
2011 बंगलूरू से कोयंबटूर 1639700
2011 चेन्नई और पुद्दुचेरी 1104744
2011 चेन्नई, पुद्दुचेरी, मदुरै, कोयंबटूर 1104744
2013 गुजरात 389492
2013 जाम नगर, जूनागढ़ और दमन-दीव 361616
2014 वाटर सप्लाई केा देखने के लिए कई शहरी एरिया 1011240
2014 नासिक 365129
2015 तमिलनाडु 350000
2015 स्पेन 285000
टूर पर बहाया जा रहा पैसा
फॉसवेक के वाइस चेयरमैन हितेश पुरी का कहना है कि जब स्टडी टूर का फायदा ही नहीं मिलता है तो फिर पता नहीं पार्षद बार-बार क्यों टूर पर जाते हैं। उनका कहना है कि एक तरफ तो नगर निगम बजट न होने का हवाला देते हुए शहरवासियों पर टैक्स लगाने की बात कर रहा है वहीं दूसरी तरफ पार्षदों के टूर पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसका शहरवासियों को कोई फायदा नहीं मिलेगा।
शहर को टूर का कोई फायदा तो मिले
फासवेक चेयरमैन एवं सेक्टर-21 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बलजिंदर सिंह का कहना है कि वह टूर के खिलाफ नहीं हैं लेकिन जो टूर के नाम पर पैसे की बर्बादी होती है, वह ठीक नहीं है। स्टडी टूर में जो संबंधित नगर निगम में अच्छी चीजें हैं, उन्हें लागू भी करना चाहिए ताकि शहरवासियों को फायदा तो मिले। जर्मनी जाकर गारबेज प्लांट को स्टडी किया गया है लेकिन जब से डड्डूमाजरा में प्लांट लगा है, तब से शहरवासी इसकी दुर्गंध से परेशान हैं।
सैर सपाटे तक सिमट जाते हैं स्टडी टूर
सेक्टर-40 ए की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दलविंदर सैनी का कहना है कि पिछले स्टडी टूरों में देखा गया है कि यह पार्षदों के सैर सपाटे तक सीमित रह जाता है जबकि जो स्टडी रिपोर्ट बनती है, उस पर सिर्फ सदन में चर्चा होती है और उसे लागू नहीं किया जाता। साल 2014 में गए स्टडी टूर की तस्वीरें जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, उससे साफ लग रहा था कि पार्षद सैर सपाटा कर रहे हैं, सीख कुछ भी नहीं रहे हैं।