चंडीगढ़ सीएफएसएल ने एक रेप किट तैयार की है, जो जल्दी ही देश भर के थानों में पहुंचा दी जाएगी, ताकि सही सैंपल लिए जा सकें। देशभर में करीब 13 हजार दुराचार के मामले सीएफएसएल रिपोर्ट के कारण अदालतों में पेंडिंग हैं। वहीं, कई मामलों में सीएफएसएल रिपोर्ट ठीक से नमूने न लिए जाने के कारण पेंडिंग है। इसका कारण जांच अधिकारियों द्वारा वारदात के बाद ठीक से सैंपल न लिए जाना है। इस समस्या को देखते हुए चंडीगढ़ सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) ने ऐसे मामलों के लिए एक किट तैयार की है।
यह किट एक पुलिस थाने में और दूसरी सरकारी अस्पताल में मौजूद रहेगी। इसमें किसी महिला से दुराचार की घटना के बाद पुलिस और अस्पताल दोनों संबंधित सैंपल लेंगे। सभी सैंपलों को जांच अधिकारी सील कर सीएफएसएल भेजेगा ताकि स्पष्ट सैंपल की मदद से जल्द रिपोर्ट तैयार हो सके और ऐसे मामलों में रिपोर्ट के कारण पीड़िता को न्याय मिलने में देरी न हो सके। यह घोषणा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने चंडीगढ़ सेक्टर-36 में सीएफएसएल लैब में ‘सखी सुरक्षा एडवांस डीएन लैब’ की नींव रखते हुए की।
इस दौरान पत्रकारों से वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह किट संभवत: इस महीने में देशभर के पुलिस थानों में भेज दी जाएगी। इसके बाद दुराचार के मामलों में सही सैंपल मिलने पर गुनहगारों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस किट की जरूरत पुलिसकर्मियों द्वारा वारदात के बाद ठीक से सैंपल न लिया जाना है। इस कारण वह कई बार आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो जाते हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार कठुआ रेप केस के बाद देश में फोरेंसिक लैब को अत्याधुनिक बनाने की जरूरत महसूस की गई।
इसके तहत देशभर की सीएफएसएल लैब को निर्भया फंड से अपग्रेड किया जा रहा है। चंडीगढ़ स्थित लैब को भी अपडेट किया जा रहा है। देशभर की सीएफएसएल लैब में दुराचार से जुड़े करीब 20 हजार मामले आते हैं। इनमें से 2000 के मुकाबले केवल 150 केसों में ही रिपोर्ट तैयार हो पाती है। इसका कारण मैन पावर और अत्याधुनिक लैब की कमी होना है, इसीलिए यह शुरुआत की जा रही है। इस लैब के शुरू होने से पांच हजार केसों में रिपोर्ट जल्द बनाई जा सकेगी।
अभी यहां हैं लैब
- दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता, हैदराबाद
यहां जल्द शुरू होंगे लैब
पुणे, भोपाल, गुवाहाटी
वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 193 से बढ़कर होगी 600
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर में वन स्टॉप सेंटर ‘सखी’ की वर्तमान में संख्या 193 है। इनकी संख्या अगले साल अप्रैल तक 600 हो जाएगी। यहां दुराचार पीड़िताओं को पुलिस, डॉक्टर, नर्स, वकील, साइक्लोजिकल काउंसलर सभी एक छत के नीचे मिलेंगे।
क्या है किट में
- इसमें ब्लड और सिमन सैंपल शीशी
- गल्ब्स, छोटी कैंची, सीरिंज, ड्रापर
- सरफेस और कॉटन स्टिक, कंटेनर
- इविडेंस जमा करने के लिए एनवेलप
- डिस्पोजल चाकू