चंडीगढ़ में बीजेपी मेयर के कार्यकाल की पहली बैठक में जबरदस्त हंगामा हुआ, जिसके बीच ही अनुबंध कमेटी का चुनाव कराया गया। 2013 के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस से सुभाष चावला, भाजपा से आशा जसवाल, सतप्रकाश अग्रवाल और मनोनीत से अरुणा गोयल और डॉ. शगुफ्ता प्रवीन को विजयी घोषित किया है। जबकि कांग्रेस ने डॉ. शगुफ्ता प्रवीन के परिणाम को चुनौती देते हुए मेयर पर आरोप लगाया कि उन्होंने मतदान में धांधली बरती है।
कांग्रेस ने परिणाम की घोषणा के साथ ही हंगामा करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। जबकि मतदान से पहले भाजपा के सतीश कैंथ ने नामांकन वापस ले लिया। सांसद किरण खेर के मतदान में भाग न लेने के कारण चुनाव जीतने वाले हर उम्मीदवार को छह वोट चाहिए थे। लेकिन सुभाष चावला, आशा जसवाल और अरुणा गोयल ने 7-7 वोट हासिल किए। जबकि गुरबख्श रावत और डॉ. शगुफ्ता प्रवीन को पहले राउंड में 4-4 वोट मिले।
सतप्रकाश अग्रवाल ने 6 वोट हासिल कर जीत हासिल की। वित्त एवं अनुबंध कमेटी का चुनाव कराने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से टीम बुलाई गई थी। क्योंकि यह मतदान प्राथमिकता के आधार पर होता है। रावत और प्रवीन को पहले राउंड में बराबर चार-चार वोट मिले। मेयर ने बाकी जीते तीन उम्मीदवार जिन्हें छह से ज्यादा वोट मिले थे, उन्हें जो प्राथमिकता के आधार पर दूसरी वरीयता के मत मिले थे। वह ट्रांसफर किए।
इसी आधार पर मेयर ने डॉ. शगुफ्ता प्रवीन को विजयी घोषित कर दिया। मनोनीत पार्षद अरुणा गोयल और भाजपा पार्षद आशा जसवाल के बैलट पेपर पर दूसरी वरीयता शगुफ्ता प्रवीन को मिली। इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की मेयर के साथ जमकर बहस भी हुई। हंगामा इतना हुआ कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा और भाजपा के पार्षद सतीश कैंथ ने मेयर के टेबल को जोर से थपथपाते हुए अपशब्द भी कहे।
मालूम हो कि एक साल पहले कैंथ कांग्रेस में ही थे। छाबड़ा ने तो कैंथ को यहां तक कहा कि उन्होंने पैर छूए थे। जिसके बाद उन्हें कांग्रेस की टिकट दी गई थी। इन दोनों के बीच इतनी तू-तू मैं-मैं हुई कि अन्य पार्षदों को बीच बचाव के लिए आना पड़ा अगर वह नहीं आते तो उनके बीच हाथापाई की नौबत तक आ गई थी।
मेयर ने जमीन पर बिठाकर कराया मतदान
पहले राउंड में चार उम्मीदवार जीत गए। इसके बाद नगर निगम के सचिव राजीव गुप्ता के पास कांग्रेस पार्षदों ने मेयर द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया का विरोध किया गया। उन्होंने मतों की गिनती करने से भी रोका। जिसके बाद मेयर अरुण सूद ने अपने ब्लॉक में अपनी कुर्सी के पीछे जमीन पर बैलेट पेपर रखकर गिनती कराई।
मतदान पत्र के बॉक्स को सील किया
चुनाव के बाद लंच के समय कांग्रेस पार्षदों ने कमिश्नर को लिखित में पत्र देकर आपत्ति जताई। जिसके बाद कमिश्नर ने कांग्रेस और भाजपा के एक एक पार्षद की मौजूदगी में मतदान की पेटी को सील किया।
20 मिनट देरी से शुरू हुआ सदन
भाजपा के मेयर अरुण सूद के नेतृत्व में यह पहली सदन की बैठक थी। लेकिन बैठक 20 मिनट देरी से शुरू हुई। जबकि कांग्रेस मेयर देरी से बैठक करती तो भाजपा के पार्षद जमकर हंगामा करते थे। देरी से शुरू हुई सदन की बैठक पर कांग्रेस पार्षदों ने एतराज भी जताया।
15 मिनट बैठक स्थगित करने का समय मांगा
अनुबंध कमेटी का चुनाव शुरू होने से पहले मनोनीत ने कांग्रेस और भाजपा से एक एक उम्मीदवार के नाम वापस लेने का दबाव बनाया। ताकि सर्वसम्मति से 5 सदस्यों का चुनाव हो जाए। जिस पर कांग्रेस पार्षद सुभाष चावला ने मेयर से 15 मिनट तक सदन की बैठक स्थगित करने की मांग की। ताकि वह निर्णय ले लें। लेकिन कांग्रेस बाद में नाम वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुई। पिछले 8 साल से ऐसा हो रहा है कि मनोनीत के दो पार्षद ही वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य बनते हैं।
किस अधिकार के तहत नामांकन की तारीख बढ़ाई
कांग्रेस के सुभाष चावला ने चुनाव से पहले मेयर से सवाल किया कि उन्होंने किस एक्ट के तहत वित्त एवं अनुबंध कमेटी की नामांकन की तारीख 18 से 23 की। जिस पर मेयर ने एक्ट का हवाला दिया। जिसमें कहा कि चुनाव की तारीख तय करने का अधिकार मेयर का है। लेकिन एक्ट में कहीं पर भी एक बार चुनाव घोषित होने के बाद उसे स्थगित कर नई तारीख घोषित करने की बात शामिल नहीं है। मेयर अरुण सूद ने तो चावला को कहा कि अगर उन्हें दिक्कत है तो वह कोर्ट में इसे चुनौती दे सकते हैं।
बिना विपक्ष के चला सदन
वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव के बाद भाजपा ने मनोनीत पार्षदों के साथ मिलकर बिना विपक्षी पार्षदों के सदन की बैठक चलाई। ऐसा काफी कम बार हुआ है, जब बिना विपक्ष के सदन चला हो। कांग्रेस पार्षद सुभाष चावला ने सदन में कहा कि उनका बहिष्कार अभी काफी लंबा रहेगा। क्योंकि मेयर ने धोखे से उनकी पार्टी उम्मीदवार गुरबख्श रावत को हराया है। चावला का कहना है कि मेयर के पीछे दर्शक दीर्घा में भाजपा पार्टी के सीनियर नेता बैठे थे जो कि पीयू में सीनेट के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।