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अतिक्रमण से चंडीगढ़ बेहालः फुटपाथ-गलियारों तक में सामान, लाइसेंस से कई गुना ज्यादा लग रहीं रेहड़ियां

Mon, 09 Sep 2024 11:06 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ में सेक्टर-15, 22, 20, 19 समेत कई मार्केटों में कुछ दुकानों का सामान पहले गलियारों में होता था। अब हालात ये हैं कि गलियारे को कब्जाने के बाद सामान लोगों के चलने के रास्ते और उसके बाद पार्किंग तक पहुंच गया है। 
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चंडीगढ़ में बढ़ रहा अतिक्रमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ का अतिक्रमण से बुरा हाल है। कई मार्केटों में दुकानों का सामान गलियारों पर कब्जे के बाद फुटपाथ और पार्किंग तक पहुंच गया है तो अवैध वेंडरों ने पैदल चलने वाले रास्तों पर भी कब्जा कर लिया है। लाइसेंस से चार गुना ज्यादा रेहड़ियां लग रही हैं। 
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सेक्टर-22 में नया खेल चल रहा है। मार्केट के साथ के कई सरकारी घरों में वेंडरों का सामान रखा जा रहा है और वो उनसे किराया वसूल रहे हैं। एनफोर्समेंट विंग के कर्मचारी-अधिकारियों को सब मालूम है लेकिन वो मूक दर्शक बने हुए हैं।

सदन में हर बार उठता है अतिक्रमण का मुद्दा

अतिक्रमण और अवैध वेंडर का मुद्दा नगर निगम की हर सदन की बैठक में उठता है। पार्षद जमकर आरोप लगाते हैं। 27 अगस्त को हुई पिछली बैठक में भाजपा के पार्षद सौरभ जोशी ने यहां तक कह दिया था कि मार्केटों से रोजाना लाखों रुपये इकट्ठे हो रहे हैं। निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। बतौर आयुक्त डीसी विनय प्रताप सिंह भी इस पर चिंतित दिखे और उन्होंने संयुक्त आयुक्त को सख्ती बरतने के आदेश दिए। 

एक दिन बाद ही एनफोर्समेंट विंग के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टरों का ट्रांसफर हुआ। कुछ इलाकों में कार्रवाई हुई लेकिन अब आयुक्त के आदेश को 12 दिन बीच चुके हैं और सभी चीजें पहले जैसी ही हो गई हैं।

रोज होते हैं कब्जे

सेक्टर-15 की पटेल मार्केट, सेक्टर-22 की शास्त्री मार्केट, सेक्टर-37डी की मार्केट, कृष्णा मार्केट-41 समेत कई इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। हैरानी की बात है कि रोजाना ये कब्जे होते हैं लेकिन निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं दिखते। कई लोगों ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि कार्रवाई करने वालों की आंखों पर नोटों की पट्टी बंधी हुई है। शहर में राजस्थानी कुल्फी, मेवाड़ आईसक्रीम समेत कई ऐसी चलती-फिरती दुकान नजर आती हैं, ये सभी अवैध हैं। पूर्व आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने इन सभी को जब्त करने के आदेश दिए थे, लेकिन आज भी धड़ल्ले से सभी सेक्टरों में ये खड़ी रहती है।

वेंडरों का सामान रखने के लिए सरकारी घरों में चोर दरवाजे, वसूल रहे किराया

सेक्टर- 22 में एक नया खेल चल रहा है। शास्त्री मार्केट में कई वेंडर कपड़ों व अन्य की दुकान लगाते हैं। सामान ज्यादा होता है इसलिए वेंडर इन्हें अपने साथ नहीं लेकर जाते बल्कि पास के ही कुछ सरकारी व निजी घरों से सांठगांठ कर सामानों को उन्हीं के पास रखते हैं। मार्केट बंद होने के बाद रात में सामान इन घरों की पिछली या आगे की तरफ रखा जाता है और सुबह निकाल लिया जाता है। सरकारी घरों में वेंडरों के लिए खास चोर दरवाजे भी बनाए गए हैं। मार्केट के पास के कुछ घर सिर्फ इसलिए अलॉट कराए जाते हैं ताकि उनमें वेंडर का सामान रखवा कर पैसे कमाए जा सके। 

एक घर में कई-कई वेंडर सामान रखते हैं। हर महीने के हिसाब से किराया देते हैं। सेक्टर-19 में भी यही खेल चल रहा है। इन मकान मालिकों को इस बात का भी डर नहीं है कि पता चलने पर घर का आवंटन तो रद्द होगा ही नौकरी भी संकट में पड़ सकती है। यूटी प्रशासन के हाउस अलॉटमेंट कमेटी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कोई भी व्यक्ति विभाग को ऐसे घरों की जानकारी दे सकता है। नियमों के अनुसार तुरंत कार्रवाई होगी। साथ ही वह भी इसकी जांच कराएंगे।
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प्लाजा में बैठते हैं वेंडर, निगम ने हाईकोर्ट में कहा-यहां कोई वेंडर नहीं

सेक्टर-17 स्थित प्लाजा को नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया है। निगम ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दिया है कि यहां कोई वेंडर नहीं बैठता लेकिन रोजाना छोटी मार्केट सजती है। नीलम थिएटर के पास बैग, जूतियां, महिलाओं के सजने का सामान, गोलगप्पे आदि की दुकानें लगती हैं। पार्षद प्रेमलता ने कहा कि आईएसबीटी-43 अवैध वेंडिंग का अड्डा बन गया है। सेक्टर-34ए और बी में काफी अतिक्रमण है। शाम के समय सेक्टर-33 और 34 की लाइटों के पास के दुकानों ने कई कब्जे किए हैं। दुकान के सामने कुर्सी-टेबल लगते हैं। सेक्टर-35सी में मेट्रो होटल वाली लाइन के पीछे पार्किंग में वेंडर बैठे हैं। वो रात भर दुकानें खोल कर रखते हैं। वहीं गंदगी फैलाते हैं। 

बता दें कि शहर में वर्ष 2016 में स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट-2014 के तहत सर्वेक्षण हुआ था और वेंडर्स को लाइसेंस दिए गए थे। नियम कहता है कि लाइसेंस उसे ही दिया जाना चाहिए जिसके पास नियमित सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की नौकरी न हो लेकिन पिछले साल निगम ने एक सर्वे में पाया था कि एक ही परिवार के कई सदस्यों के पास लाइसेंस है। कई बड़े दुकानदार भी हैं, जिनके पास वेंडिंग की साइटें हैं।

अधिकतर नहीं जमा कर रहे लाइसेंस फीस, कइयों को नोटिस

नगर निगम में 10,920 वेंडर पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से करीब तीन हजार वेंडर की ही हर माह लाइसेंस फीस जमा करवा रहे हैं, जबकि शहर में इससे चार गुना वेंडर काम कर रहे हैं। अन्य वेंडरों के लाइसेंस फीस नहीं जमा कराने से नगर निगम को लाखों रुपये की चपत लग रही है। कई वेंडर्स ने तो वर्ष 2018 के बाद से लाइसेंस फीस चुकाया ही नहीं है। उनका लाइसेंस रद्द करने के लिए दिसंबर 2023 में कईयों को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद कईयों की सुनवाई हुई और उन्होंने फीस जमा करने की बात रही। हालांकि अभी भी उनमें से कईयों ने फीस नहीं चुकाया है। उनके खिलाफ भी निगम कार्रवाई करने जा रहा है। बता दें कि छह जुलाई 2023 को टाउन वेंडिंग कमेटी ने यह निर्णय लिया था कि जिन वेंडरों ने अप्रैल 2018 से अब तक फीस नहीं जमा कराई है, उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।

अवैध वेंडर और अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की तरफ से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कुछ मार्केटों में अवैध वेंडर की समस्या ज्यादा है। इसको लेकर अतिरिक्त इंस्पेक्टर-सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी भी लगाई गई है। किसी भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी घरों में जो सामान रखा जा रहा है, इसको लेकर प्रशासन के अधिकारियों को जानकारी दी जाएगी ताकि इन पर कार्रवाई की जाए। - कुलदीप कुमार, मेयर
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