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एक फैसले ने 10 हजार लोगों को परेशानी में डाला

Fri, 06 Nov 2015 02:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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यूटी प्रशासन के एक फैसले से दस हजार से ज्यादा लोग अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं। 2013 में यूटी के एजुकेशन डिपार्टमेंट ने क्लर्क की 87 पोस्ट व स्टेनोग्राफ की सात पोस्ट निकाली थी। एक लाख से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया।
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दो साल तक पोस्ट के लिए न तो कोई लिखित परीक्षा हुई और न ही इंटरव्यू। सितंबर 2015 को अचानक से यूटी प्रशासन की ओर से विज्ञापन जारी किया गया। उसमें लिखा था कि ये पोस्टें रद्द की जा रही हैं। आवेदन के साथ जो भी रुपये जमा हुए थे, वे जल्द से जल्द वापस कर दिए जाएंगे।

अक्तूबर में जारी किया नया विज्ञापन
एक माह बाद ही दो अक्तूबर 2015 को एजुकेशन डिपार्टमेंट ने पुरानी पोस्टों को साथ जोड़कर नई पोस्टों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। इस दफा क्लर्क की 253 पोस्ट, 30 स्टेनोग्राफर, एलडीसी 42 व इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टेनोग्राफर की चार पोस्टों के लिए आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन इसमें उन लोगों के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया है, जिन्होंने दो साल पहले मांगे गए आवेदन में अप्लाई किया था।
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अधिकतर हो गए ओवरएज
पहले आवेदन कर चुके लोगों में से अधिकतर लोग ऐसे हैं, जो अब ओवरएज हो चुके हैं और वे अप्लाई भी नहीं कर सकते हैं। इन लोगों की संख्या करीब दस हजार से ज्यादा बताई जा रही है। ये लोग इस आस में थे कि 2013 में मंगवाए गए आवेदनों के टेस्ट होंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

पहले आवेदन करने वालों को मिलनी चाहिए थी रियायत
विशेषज्ञों ने बताया कि नौकरियों के निकाले गए आवेदन जब भी रद्द कर दोबारा निकाले जाते हैं तो उन लोगों को जरूर रियायत दी जाती है, जिन्होंने पहले मांगे गए आवेदन में अप्लाई किया होता है। हालांकि मौजूदा आवेदन रीएडवरटीजमेंट नहीं है, जबकि पुराने पदों को जोड़कर नया विज्ञापन जारी किया गया है।

लगाए चक्कर, नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट पहुंचे
पुराने आवेदकों ने प्रशासन के हर अधिकारी से मुलाकात की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इससे निराश कैंडिडेंट हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने जनहित याचिका दायर करने की एप्लीकेशंस हाईकोर्ट में दे दी है। दीपावली के बाद इस मामले की सुनवाई हो सकती है। इसके अलावा कई अन्य कैंडिडेंट भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
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