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ली काबूर्जिए की ऐतिहासिक धरोहर बचाने के लिए बड़ी कवायद

Mon, 12 Oct 2015 07:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के निर्माता ली काबूर्जिए की ऐतिहासिक धरोहर बचाने के लिए प्रशासन चौकन्ना हो गया। अब एक बड़ी कवायद की जा रही है। ली कार्बूजिए और उनके सहयोगी द्वारा तैयार किए गए 12 हजार हेरिटेज फर्नीचर का रिकार्ड नए सिरे से जुटाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
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उधर, यूटी प्रशासन ने हेरिटेज फर्नीचर की चोरी और तस्करी रोकने के लिए प्रशासन जल्द नया फरमान जारी करने जा रहा है। प्रशासन को कई शैक्षणिक संस्थानों द्वारा अपने स्तर पर पुराने फर्नीचर को कबाड़ियों को बेचने की जानकारी मिल है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार शैक्षणिक संस्थान या अन्य सरकारी दफ्तर में ली कार्बूजिए के समय का खराब हुआ फर्नीचर प्रशासन की अनुमति के बिना कबाड़ियों को नहीं बेचा जाएगा। जल्द सभी सरकारी स्कूलों, कालेज, पीयू और पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (पेक) को बिना अनुमति पुराना फर्नीचर नहीं बेचने का सर्कुलर जारी किया जाएगा।
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खराब फर्नीचर की होगी रिपेयर

ली कार्बूजिए और उनके सहयोगी पियरे जेनेरे द्वारा छोटे से छोटे फर्नीचर आइटम को अब प्रशासन सहेज कर रखेगा। अधिकारियों के अनुसार सभी विभागों को टूट चुके या कुछ खराब हो चुके हेरिटेज फर्नीचर की जानकारी देने के लिए कहा गया है। यूटी प्रशासन हेरिटेज फर्नीचर को फिर से ठीक करवाएगा। काफी दुर्लभ फर्नीचर को ली कार्बूजिए सेंटर में रखा जाएगा।  

पुलिस ने कबाड़ी की दुकानों को खंगाला
23 सिंतबर को ली कार्बूजिए सेंटर में हुई चोरी का राज पुलिस के लिए भी सिरदर्द बन गया है। पुलिस मामले में अभी तक कोई भी पुख्ता जानकारी हासिल नहीं कर पाई है। पुलिस सेकेंड हैंड फर्नीचर बेचने वाली दुकानों और कई कबाड़ियों की दुकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है। लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है। एडवाइजर विजय कुमार और गृहसचिव अनुराग अग्रवाल के आदेशों के बाद खुल एसएसपी डा.सुखचैन सिंह गिल घटना स्थल का दौरा कर मामले को जल्द सुलझाने के आदेश जारी कर चुके हैं। लेकिन सेक्टर-19 थाना की जांच टीम को कुछ भी हाथ नहीं लगा है।

शहर में हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। सभी शैक्षणिक संस्थानों और अन्य दफ्तरों से ताजा रिकार्ड मंगवाया गया है। कोई भी संस्था अपने स्तर पर पुराने फर्नीचर को नहीं बेच सकेगा। खराब हो चुके फर्नीचर को बेचने के लिए कमेटी की अनुमति लेनी होगी।
- अनुराग अग्रवाल, गृहसचिव चंडीगढ़
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