चंडीगढ़ नगर निगम को इस बार केंद्र से 543 करोड़ का बजट मिला है। वहीं, निगम ने अपने विभागों से 616 करोड़ का राजस्व लाने का दावा किया है। ऐसे में निगम को कुल 1159 करोड़ रुपये मिलेंगे। निगम ने पूरे साल में 744 करोड़ के अनिवार्य खर्च बताए हैं। ऐसे में पानी के दाम नहीं बढ़ाए गए तो कुल राजस्व में से ही घाटे को भरना होगा। इससे विकास कार्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा दो करोड़ रुपये निगम को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत मिले हैं।
निगम प्रशासन के पास 1725.19 करोड़ का बजट पास करके भेजा है। इसमें निगम ने चार पेट्रोल पंप से 236.52 करोड़ का राजस्व आएगा। पानी व सीवरेज से 156 करोड़ रुपये, व्यावसायिक संपत्ति कर से 65 करोड़ रुपये और आवासीय संपत्ति कर से 15 करोड़ रुपये का राजस्व आने की उम्मीद जताई है। वर्तमान में निगम को पेयजलापूर्ति और सीवर सेस से 120 करोड़ रुपये राजस्व आ रहा है। यह राजस्व पानी की दरों के पुराने दाम के आधार पर है, जबकि निगम ने इस बार 36 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व लाने का दावा किया है।
तत्कालीन प्रशासक के निर्देशानुसार 31 मार्च 2022 के बाद बढ़े हुए पानी के दाम फिर से लागू होने हैं, इसी आधार पर निगम ने यह राजस्व रखा है। राजनीतिक पार्टियों के विरोध के बाद राजस्व नहीं बढ़ा तो यह 36 करोड़ रुपये 1159 करोड़ में से ही खर्चने होंगे। ऐसे में निगम के विकास कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। निगम के अनुसार वेतन, पेट्रोल, बिजली बिल सहित निगम के पास हर माह 62 करोड़ रुपये के अनिवार्य खर्चे हैं।
कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए 77 करोड़ का प्रस्ताव
निगम ने केंद्र सरकार को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत दूसरे कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए 77 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है, जबकि अभी वहां से 2 करोड़ रुपये ही मिले हैं। इसके अलावा प्लांट में नई मशीनों को लगाने सहित कुछ मशीनों को अपग्रेड करने के लिए प्रस्ताव रखा है। यह खर्चा कैसे पूरा होगा निगम को यह भी देखना होगा।