साल 2014 से 2017 तक चंडीगढ़ में उपवन सरंक्षक के पद में रहे बिरेंद्र चौधरी वर्तमान समय में अंडमान निकोबार में कार्यरत हैं। केंद्र सरकार ने सीबीआई को उनके खिलाफ प्रासिक्यूशन सेंक्शन यानी केस चलाने की अनुमति दे दी है। इस मामले पर अब 29 अगस्त से सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होगी।
साल 2014 से 2017 तक चंडीगढ़ में उपवन सरंक्षक के पद में रहे आईएफएस अफसर बिरेंद्र चौधरी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केस चलाने के लिए सीबीआई को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। सीबीआई ने तीन साल पहले बिरेंद्र चौधरी व उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आईएफएस अफसर बिरेंद्र चौधरी ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए आय से 186.33 गुणा अधिक संपत्ति बनाई थी। अगस्त 2017 में आरा मिल मालिकों की शिकायत पर सीबीआई ने एक लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में चौधरी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में वे बहाल हो गए थे।
शक होने पर सीबीआई ने संपत्ति की थी जांच
आरा मिल मालिकों की शिकायत पर एक लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में सीबीआई ने आईएफएस अफसर बिरेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सीबीआई को चौधरी पर आय से अधिक संपत्ति होने का शक हुआ, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई। जांच के दौरान साल 2011 से 2021 तक की अवधि की आय और संपत्ति का आंकलन किया। इस दौरान पता चला कि 2011 में उनकी कुल चल-अचल संपत्ति 22.60 लाख रुपये थी। वहीं, साल 2021 में बढ़कर 2.40 करोड़ रुपये पहुंच गई।
अफसर संग पत्नी ने दायर की जमानत अर्जी
बिरेंद्र चौधरी और उनकी पत्नी ने सीबीआई की विशेष अदालत में जमानत अर्जी दायर कर दी है। दोनों को अदालत ने पेश होने के लिए समन किए हैं। ऐसे में उन्हें शक है कि अगर वे पेश हुए तो सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दायर कर दी है। जमानत अर्जी पर सुनवाई 12 तारीख को होगी।