केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पीजीआई के एमएस अनिल कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनको चार्जशीट किए जाने पर स्टे लगा दिया है। अनिल कुमार ने पीजीआई में डायरेक्टर पद के लिए आवेदन किया था, इस पर पीजीआई की ओर से उन्हें चार्जशीट होने के कारण उनकी दावेदारी खतरे पर पड़ रही थी। इसके खिलाफ एमएस ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी।
एमएस अनिल कुमार ने कैट में दायर याचिका में कहा था कि सितंबर 2014 में उन्हें वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के एक प्रोजेक्ट पर तीन महीने के लिए विदेश भेजा गया था। इसके लिए उन्होंने पूर्व में ही डायरेक्टर के समक्ष आवेदन कर दिया था। उनके अनुसार पीजीआई रेगुलेशन 2008 में संशोधन के तहत फैकल्टी मेंबरों की विदेश में मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, वर्कशॉप आदि के लिए 180 दिन तक की छुट्टियों को डायरेक्टर ही अप्रूव कर सकते हैं। लेकिन, डायरेक्टर ने इसे अप्रूव करने के बजाय इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट के पास भेज दिया। उन्हें पूरे फैक्ट नहीं बताए गए थे।
इस आधार पर उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद पीजीआई की ओर से उनकी छुट्टियां अप्रूव न होने की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें वापस आने को कहा गया। याचिकाकर्ता के अनुसार वह प्रोजेक्ट को बीच में छोड़कर नहीं आ सकते थे। इस कारण पीजीआई प्रशासन ने उनको 15 सितंबर से 21 दिसंबर, 2014 तक अनुपस्थित दिखाते हुए उन्हें चार्जशीट कर दिया था।
वर्तमान में पीजीआई में डायरेक्टर की पोस्ट खाली है। इसके लिए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट गुप्ता ने दावेदारी पेश की थी। हालांकि इसके लिए उन्हें विजिलेंस क्लीरेंस जरूरी है। लेकिन, चार्जशीट होने के कारण उनकी दावेदारी खतरे में पड़ रही थी। इस पर उन्होंने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, पीजीआई मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और प्रेसिडेंट पीजीआईएमईआर को प्रतिवादी बनाया था।