चंडीगढ़। सीलिएक रोग आनुवंशिक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें ग्लूटेन के सेवन से छोटी आंत को नुकसान होता है। सीलिएक रोग के लक्षणों में दस्त, पेट में दर्द, गैस, थकान, वजन कम होना और बच्चों में विकास में कमी शामिल हो सकते हैं। यह बात प्रो. साधना लाल ने शुक्रवार को पीजीआई में बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के माध्यम से सीलिएक रोग दिवस को समर्पित जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम के दौरान कही।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीलिएक रोग से प्रभावित बच्चों के लिए प्रारंभिक निदान, सख्त आहार प्रबंधन और व्यापक मनोवैज्ञानिक सहायता के महत्व को उजागर करना था। विभाग प्रमुख प्रो. साधना लाल ने कहा कि पीजीआई 1980 के दशक से सीलिएक रोग के निदान में सबसे आगे रहा है। आज तक लगभग 18 हजार रोगियों का इलाज किया है।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी भारतीय राज्यों में सीलिएक रोग काफी प्रचलित है, जो आनुवंशिक प्रवृत्ति और मुख्य रूप से गेहूं पर आधारित आहार के कारण है। उन्होंने आगाह किया कि लक्षणों की सूक्ष्म या गैर-विशिष्ट प्रस्तुति के कारण कई मामले निदान नहीं हो पाते हैं। पीजीआई में किए गए शोध से पता चला है कि उत्तर भारत में हर 100 बच्चों में से लगभग एक को सीलिएक रोग हो सकता है।