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सीमावर्ती इलाकों के सभी नाकों पर लगेंगे सीसीटीवी, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने दिया आदेश

Wed, 25 Jul 2018 09:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को सुझाव दिया कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ के जवानों की सीमा पर तैनाती की अवधि घटाई जानी चाहिए ताकि जवानों के तस्करों के साथ कथित गठजोड़ को तोड़ा जा सके।
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इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती इलाकों के सभी नाकों पर वाई-फाई सीसीटीवी स्थापित करने का आदेश भी दिया ताकि इस धंधे में शामिल लोगों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने नशों के खिलाफ जंग में केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के साथ सूचनाओं के प्रभावशाली आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए नशा विरोधी अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में नशे के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एसटीएफ को पंजाब पुलिस के दायरे में लाने का निर्णय इसी लिए जरूरी था। एसटीएफ अब इंटेलिजेंस और विजिलेंस की भांति पंजाब पुलिस के डीजीपी के अधीन सीधे काम कर सकेगी। 
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राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच ज्यादा तालमेल की जरूरत 
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी समस्या बने नशे के अलावा अन्य अपराधों से निपटने के लिए सभी राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच ज्यादा तालमेल की जरूरत है। नशे के अलावा महिलाओं की तस्करी, आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और निर्दोष लोगों के साथ ठगी करने वाले अनाधिकृत ट्रैवल एजेंट जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) जैसे तत्वों की कोशिशों के खिलाफ अलग-अलग एजेंसियों द्वारा ठोस कार्रवाई का आह्वान किया, जोकि रेफरेंडम 2020 की मुहिम से प्रदेश को बांटने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि हमें इनकी कोशिशों का मुंहतोड़ जवाब देना होगा।

एसडीएम, डीएसपी, एसएचओ होंगे जिम्मेदार 
प्रदेश के सभी डीसी और एसएसपी/पुलिस कमिश्नरों की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि अपने-अपने इलाके को नशामुक्त बनाने के लिए एसडीएम, डीएसपी और एसएचओ जिम्मेदार और जवाबदेह होंगे। उन्होंने नशा छुड़ाओ कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए भी जिम्मेदारी तय की। कैप्टन ने कहा कि मेडिकल, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों की नशा संबंधी प्राप्तियों को उनके विभागीय एसीआर में दर्ज किया जाए।

इससे अन्य अधिकारियों को भी नशे के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा माफिया को किसी भी तरह के सहयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध कोई भी दोषी पाया गया तो उसे सख्त सजा का सामना करना होगा।
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