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कैट ने रखा डीएसपी से एसपी पदोन्नत देने का फैसला सुरक्षित

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चंडीगढ़। राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 33 फीसदी कोटे में डीएसपी से एसपी (आईपीएस) पदोन्नत करने की मांग कर रहे डीएसपी रामगोपाल के दायर दूसरे केस में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने वीरवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब मामले में कैट अपना फैसला किसी भी दिन सुना सकता है।
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डीएसपी रामगोपाल ने यह केस यूपीएससी, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग होम सेक्रेटरी, प्रशासक के सलाहकार और चंडीगढ़ डीजीपी के खिलाफ दायर किया था। वीरवार को कैट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वर्ष 2019 में यूटी डीएसपी रामगोपाल की तरफ से कैट में दायर किए गए केस के अनुसार, वह जून वर्ष 2009 में डीएसपी पद पर पदोन्नत हुए थे लेकिन उन्हें अब तक एसपी की पदोन्नति नहीं दी गई है जबकि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आईपीएस नियुक्ति रेगुलेशन एक्ट 1955 के तहत डीएसपी से एसपी (आईपीएस) पदोन्नति दिए जाने का 33 फीसदी कोटा है। इसके लिए जो जरूरी योग्यता है उसमें डीएसपी पद पर आठ वर्ष कार्य करने के अनुभव के साथ साथ 54 वर्ष से कम की आयु होनी चाहिए। जिस जगह एसपी (आईपीएस) पदोन्नत किया जाता है, उस प्रदेश या यूटी में 33 फीसदी कोटे में सीट खाली होनी चाहिए। रामगोपाल की तरफ से दलील दी गई कि एक जून वर्ष 2009 से एक जून 2017 तक उन्हें डीएसपी पद पर कार्य करते हुए आठ वर्ष हो चुके थे और उनकी आयु उस दौरान 49 वर्ष थी। बावजूद इसके उन्हें अब तक इस कोटे के तहत एसपी (आईपीएस) की पदोन्नति नहीं दी गई है।
डीएसपी रामगोपाल को एसपी बनाने के दिए थे आदेश
पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स के मुताबिक, छह साल में डीएसपी से एसपी बनाने की याचिका में कैट ने मंगलवार को रामगोपाल के हक में फैसला सुनाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और डीजीपी चंडीगढ़ को आदेश दिया था कि वह पंजाब नियमों के मुताबिक, डीएसपी रामगोपाल को अगले दो महीने के भीतर पदोन्नति दे दें। रामगोपाल ने इस केस में भी एसपी पदोन्नत की मांग की थी। रामगोपाल ने दलील दी थी कि चंडीगढ़ में पंजाब के नियमों को फॉलो किया जाता है। ऐसे में पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स 1959 के नियमों के मुताबिक, किसी भी डीएसपी पद पर तैनात अधिकारी का अगर लगातार छह वर्ष कार्य का अनुभव हो तो वह एसपी रैंक तक पदोन्नत किया जा सकता है। इसके बाद कैट ने रामगोपाल की याचिका को सही ठहराते हुए उन्हें पदोन्नति दिए जाने का फैसला सुनाया था।
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