एफआईआर दर्ज करते हुए आरोपी की जाति लिखे जाने को जातिवाद बढ़ाने वाला करार देते हुए इस पर रोक लगाए जाने के लिए जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को 25 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने याचिका में कहा है कि जब हमारा संविधान जातिवाद मुक्त और सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देने वाला है, तो फिर एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति क्यों दर्ज की जाती है।
पंजाब पुलिस रूल्स-1934 के नियमों में एफआईआर दर्ज करते समय आरोपी और पीड़ित की जाति लिखे जाने का प्रावधान है। अरोड़ा ने कहा कि यह प्रावधान संविधान से पहले के हैं। अब यह न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि संविधान की मूल भावना का भी उल्लंघन है। अरोड़ा ने बताया कि बीते साल सितंबर माह में शिमला हाईकोर्ट ने भी पुलिस रूल्स के तहत विभिन्न फॉर्म्स में से जाति के कॉलम को खत्म करने के निर्देश दिए थे।
ऐसे में हरियाणा, पंजाब और यूटी में भी यह व्यवस्था समाप्त करने की अपील की गई। इसके साथ ही अदालत से आग्रह किया है कि एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति न लिखे जाने के निर्देश दें।