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Chandigarh News: कल्याणी पर आज से चलेगा हत्या, साजिश व सबूत मिटाने का केस

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चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी सिद्धू की हत्या के मामले में आरोपी कल्याणी सिंह के खिलाफ ट्रायल सोमवार से सीबीआई की विशेष अदालत में शुरू होगा। सीबीआई कोर्ट पहले ही कल्याणी पर केस चलाने के लिए हत्या, सुबूत मिटाने व हत्या की साजिश रचने की धाराओं के तहत आरोप तय कर चुकी है। हालांकि इससे पहले बचाव पक्ष बार-बार अलग-अलग तरह की याचिकाएं दायर कर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास करता रहा लेकिन किसी स्तर पर आरोपी को कोई राहत नहीं मिली। खास बात यह है कि ये याचिकाएं हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दायर की गईं।
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वर्ष 2015 में सेक्टर-27 के एक पार्क में सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी सिद्धू को चार गोलियां मारी गई थीं। हत्या के बाद सिद्धू के शव के पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर से चारों गोलियां निकली थीं। पहले तो इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद सबूतों के आधार पर सीबीआई ने महिला जज की बेटी कल्याणी सिंह को इस हत्याकांड में गिरफ्तार किया और कोर्ट में दावा किया कि आरोपी कल्याणी ने भी सिप्पी सिद्धू पर गोली चलाई थी।
इस हत्याकांड में सीबीआई ने कल्याणी सिंह को ही मुख्य आरोपी बनाया और उसके खिलाफ वर्ष 2022 में चार्जशीट दायर की। सीबीआई की इस चार्जशीट में कुल 84 गवाह बनाए गए। कई महीनों बाद आरोपी कल्याणी को सीबीआई कोर्ट से जमानत मिली जबकि सीबीआई ने कोर्ट में दायर अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सिप्पी सिद्धू और कल्याणी बेहद नजदीकी संबंध में थे और दोनों एक-दूसरे से शादी भी करना चाहते थे लेकिन सिप्पी सिद्धू के परिजनों ने शादी इंकार कर दिया था। सीबीआई ने कोर्ट में दिखाए दस्तावेजों में यह भी दावा किया था कि शादी से इन्कार होने के बाद सिप्पी ने कल्याणी की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें परिवार और दोस्तों के बीच साझा कर दीं, जिसके चलते दोनों के बीच अनबन हुई थी। इसी कारण सिप्पी सिद्धू की हत्या अंजाम दिया गया था।
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हत्या की धारा में आजीवन कारावास या फांसी की सजा : आरोपी कल्याणी पर हत्या की धारा 302, सुबूत मिटाने की धारा 201 व साजिश रचने की धारा के तहत आरोप तय किए गए हैं। हत्या की धारा 302 के तहत आरोपी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड (हत्या की गंभीरता के आधार पर) के साथ-साथ जुर्माने की सजा दी जा सकती है। यह एक गैर जमानती और संज्ञेय अपराध है जो जिला एवं सेशन कोर्ट में चलता है। इसके साथ ही सुबूत मिटाने की धारा 201 के तहत आरोपी को अपराधी को 7 साल तक की सजा हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे दस्तावेज उपलब्ध करवाने के आदेश : मुख्य आरोपी कल्याणी ने सीबीआई की ओर से उसके खिलाफ बनाए गए गवाहों से संबंधित कुछ रिकॉर्ड मांगे थे। सीबीआई सहित हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं जो डिसमिस हो गईं। बावजूद इसके आरोपी पक्ष सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और वहां याचिका दायर की। कोर्ट ने सीबीआई की जांच टीम को आरोपी पक्ष की याचिका के मुताबिक दस्तावेज उपलब्ध करवाने संबंधित आदेश दिए थे। सीबीआई ने करीब एक महीने पूर्व सीबीआई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दस्तावेज आरोपी पक्ष को सौंप दिए थे। हालांकि आरोपी पक्ष के मुताबिक उन्हें पूरे दस्तावेज नहीं सौंपे गए।
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