अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती मरीजों के शौच की सफाई के लिए उनके परिजनों को वार्ड में बुलाया जा रहा है। कोरोना संक्रमित एक मरीज के परिजन ने बताया कि उसकी मां छह दिन से वहां भर्ती है। आमतौर पर तो उसे वार्ड में नहीं जाने दिया जाता, लेकिन जब यूरिन बैग भरकर फट जाता है तो बेड के नीचे सफाई के लिए उसे जबरदस्ती बुलाया जाता है जबकि यह काम वार्ड के अटेंडेंट का है। अटेंडेंट मरीज को तो हाथ लगाते नहीं, शौच की सफाई क्या करेंगे। परिजन ने बताया कि अस्पताल के कोविड वार्ड की स्थिति बहुत ही दयनीय है।
विशेषज्ञ बोले- हाथ बांधकर इलाज करना गलत, कोविड मरीज मानसिक रोगी नहीं
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमणीक सिंह बेदी का कहना है कि कोविड-19 के कारण मरीज में ऐसा कोई बदलाव नहीं आता, जिस कारण उसके हाथ पर बांधने की नौबत आ जाए। आमतौर पर मानसिक रूप से विक्षिप्त या स्ट्रोक व ऐसी ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के हाथ बांधने की नौबत आती है। लेकिन उन मरीजों को जनरल वार्ड में नहीं रखा जा सकता। जनरल वार्ड में भर्ती मरीज के साथ अगर ऐसा किया गया है तो वह गलत है। इससे उस मरीज के साथ ही वहां भर्ती अन्य मरीजों का तनाव बढ़ सकता है। इससे उनका इलाज भी प्रभावित हो सकता है।
अस्पताल में कोविड के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कोविड वार्ड में नर्सिंग स्टूडेंट और इंटर्न की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा अटेंडेंट की भी संख्या बढ़ा दी गई है। जहां तक मरीज का हाथ बांधे जाने की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी, ताकि हकीकत का पता चल सके। -डॉ जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच- 32