चंडीगढ़। शहर के कई पार्क लोगों के लिए निजी पार्क बन चुके हैं। किसी ने अपनी चहारदीवारी पर छोटे-छोटे गेट लगा लिए तो किसी ने सब्जियां उगाई हुई हैं। नगर निगम ने 156 ऐसे पार्कों की पहचान की है। अब इन कब्जों को छुड़ाने के लिए अभियान चल रहा है। पिछले कुछ दिनों में निगम ने 120 पार्कों से यह अतिक्रमण हटाया है। अभी भी अभियान जारी है। नगर निगम को पिछले काफी समय से यह शिकायत मिल रही थी कि शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों ने घरों के साथ लगते पार्क में किसी न किसी तरह से कब्जा करने की कोशिश की है। घर के साथ लगते पार्क के हिस्से के सौंदर्यीकरण से अतिक्रमण की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे कई लोगों ने पार्क के उस हिस्से को अपना ही समझ लिया, जिसकी वजह से आसपास के लोगों को परेशानी होती है। कई सेक्टरों में घरों की आखिर या शुरुआत में छोटे-छोटे पार्क बने हुए हैं, जो कॉर्नर के घरों के साथ लगते हैं। इनमें से ही कुछ लोगों ने साथ लगते पार्क में अतिक्रमण किया हुआ है। जो पार्क जनता के लिए विकसित किए गए हैं, वह कुछ घरों के लिए निजी पार्क बनकर रह गए हैं। नगर निगम को इस संबंध में कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने पूरे शहर का सर्वे कराया और ऐसे छोटे-छोटे पार्कों की पहचान की गई जिनमें अतिक्रमण था और अब अभियान चलाकर उन सभी अतिक्रमणों को हटाया जा रहा है। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में 156 पार्कों की पहचान हुई है, जिसमें किसी न किसी तरह से अतिक्रमण की कोशिश की गई है और उनमें से 120 पार्कों में से अतिक्रमण को हटा दिया गया है।
किसी ने गाड़ी खड़ी करने के लिए पार्क पर किया अतिक्रमण
नगर निगम की टीम ने पाया कि कई लोगों ने अतिक्रमण वाले स्थानों का उपयोग लॉन के रूप में किया, जबकि कई ने सब्जियां या फूल उगा लिए हैं। कुछ अन्य स्थानों पर लोगों ने निजी उपयोग के लिए पार्क के कुछ हिस्से पर अतिक्रमण करने के लिए लोहे की ग्रिल लगा दी थी, जिससे पैदल चलने वालों के लिए बहुत कम जगह बची थी। कुछ लोगों ने अपने वाहन पार्क करने के लिए पड़ोस के पार्कों पर अतिक्रमण कर लिया था। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह अतिक्रमण अचानक हुए हैं, यह क्रम पिछले कई साल से जारी था और लोगों ने धीरे-धीरे अतिक्रमण करने की कोशिश की है। नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में कुल 1800 पार्क और 100 ग्रीन बेल्ट हैं। नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि यह अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा और अन्य इलाकों में भी ऐसे पार्कों की पहचान का सिलसिला जारी है।
कई लोग बोले- पार्क सुंदर दिखे इसलिए लगाए फूल-पौधे
नगर निगम की इस कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। कुछ इलाकों में जब नगर निगम की टीम पार्कों में से अतिक्रमण हटाने पहुंची तो स्थानीय लोगों ने एरिया पार्षद को फोन किया और फिर इस कार्रवाई को रोकने का आग्रह किया। हालांकि अतिक्रमण को कोई भी जायज नहीं ठहरा सकता, इसलिए इस कार्रवाई को रोक नहीं जा सका। कई लोगों का आरोप है कि नगर निगम की तरफ से चुने हुए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि नगर निगम की तरफ से इन पार्कों का सही से रखरखाव नहीं होता है इसलिए उन्होंने अपने खर्चे पर उसे विकसित किया ताकि वह देखने में सुंदर लगे। हालांकि उसे भी नगर निगम की तरफ से हटा दिया गया।